इराक़ में अमरीकी बलिदान के प्रति नतमस्तक ओबामा

ओबामा

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इराक़ में अमरीकी सैन्य अभियान की समाप्ति पर कहा कि इराक़ के लोगों के हाथों उनका भविष्य सौंपने के लिए अमरीका ने भारी क़ीमत अदा की है.

अपने ओवल ऑफ़िस से प्रसारित भाषण में उन्होंने कहा कि अमरीकी सेना के बलिदान को लेकर वो ऋणी हैं. ये दूसरा मौक़ा है जब राष्ट्रपति ओबामा ने अपने ओवल ऑफ़िस से संबोधित किया है.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा,'' ऑपरेशन इराक़ी फ़्रीडम समाप्त हो गया है और अब इराक़ के लोगों को अपने देश की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी ख़ुद लेनी है.''

ओबामा का कहना था कि संघर्ष समाप्ति अमरीका और इराक़ दोनों के हित में है.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा,'' हमने अपने युवाओं को इराक़ में बलिदान के लिए भेजा और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद संसाधन वहाँ भेजे...हालांकि ये अमरीका और इराक़ के इतिहास का अहम हिस्सा है, हमने अपनी ज़िम्मेदारियाँ पूरी कीं और अब वक्त है इतिहास के इस पन्ने को पलटने का.''

उन्होंने कहा कि अमरीका इराक़ की सरकार और लोगों का हमेशा समर्थन करता रहेगा.

राष्ट्रपति ओबामा ने जानकारी दी कि उन्होंने दिन में पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से बात की थी.

उल्लेखनीय है कि बुश पर अमरीका को इराक़ युद्ध में धकेलने का आरोप लगाया जाता है.

उन्होंने कहा,'' ये जगजाहिर है कि मैं युद्ध को लेकर उनसे सहमत नहीं था. लेकिन राष्ट्रपति बुश के सेनाओं के प्रति समर्थन को लेकर कोई संदेह नहीं कर सकता.''

ओबामा ने कहा,'' मैंने पहले भी कहा है कि देशभक्तों ने इस युद्ध का समर्थन किया और देशभक्तों ने इसका विरोध भी किया. और हम सभी अमरीकी सैनिकों के बहादुरी को स्वीकार करते हैं.''

अफ़ग़ानिस्तान की चुनौती

वॉशिंगटन से बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद का कहना है कि राष्ट्रपति ओबामा ने अमरीका का अफ़ग़ानिस्तान संघर्ष की भी बात की.

लगता है कि वो ऐसे मुद्दों पर ध्यान देना चाह रहे हैं जो दो महीने बाद होने मध्यावधि चुनाव में अहम होंगे.

ओबामा ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका का अभियान सीमित समय के लिए जारी रहेगा, जब तक कि अफ़ग़ानिस्तान के सुरक्षाबल ज़िम्मेदारी संभाल नहीं लेते हैं.

उन्होंने कहा कि अमरीका के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है.

उत्तरी अमरीका में बीबीसी के संपादक मार्क मार्डल कहते हैं कि कई लोगों का मानना है कि युद्ध बहुत बड़ी ग़लती थी. ये युद्ध उन आरोपों पर लड़ा गया जो ग़लत साबित हुए थे. इसके बाद दुनियाभर में अमरीका की प्रतिष्ठा कम हुई है.

जहां कुछ इराक़ी लोगों ने अमरीका की सेना के निकलने का स्वागत किया है वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ये सब बहुत जल्दी हो रहा है और उनका देश अभी अपनी सुरक्षा ख़ुद करने के लिए तैयार नहीं है.

इराक़ में अब भी सरकार बनना बाक़ी है क्योंकि मार्च में हुए चुनावों के बाद कोई स्पष्ट नतीजा नहीं निकल पाया था.

ऑपरेशन न्यू डॉन

इराक़ पर हमले के साढ़े सात साल बाद वहाँ अमरीकी सैन्य अभियान मंगलवार को आधिकारिक रूप से समाप्त गया.

मंगलवार को इराक़ी फ़्रीडम का आख़िरी दिन था और बुधवार से ये ऑपरेशन न्यू डॉन यानी नई शुरुआत कहलाएगा.

अब इराक़ी सुरक्षाबलों को सलाह और प्रशिक्षण देने, विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाने और अमरीकी हितों की रक्षा के लिए लगभग 50 हज़ार अमरीकी सैनिक इराक़ में बने रहेंगे.

ये सैनिक हथियारबंद होंगे और केवल आत्मरक्षा और इराक़ी सरकार के अनुरोध पर ही हथियार उठाएंगे.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इराक़ी वायु सेना बहुत कमजोर है और इराक़ में सैनिक कार्रवाई अमरीकी विमानों और हेलिकॉप्टरों की सहायता के बिना नहीं सफल हो पाएगी.

अमरीका ने स्पष्ट किया है कि इराक़ में अमरीका का अभियान समाप्त नहीं हो रहा है लेकिन ये सैन्य अभियान से हटकर नागरिक सहयोग की ओर बढ़ रहा है.

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