'साफ़ पानी देने में विफल रहे देश'

पानी

एक अंतरराष्ट्रीय सहायता संस्था ने दुनियाभर के नेताओं की ग़रीबों को साफ़ पानी देने का वादा पूरा न करने की आलोचना की है.

सहायता संस्था 'चैरिटी वॉटर एड' ने कहा है कि शताब्दी के लिए तय किए गए आठ लक्ष्यों में से एक था 2015 तक जिन लोगों के पास साफ़ पानी नहीं पहुँच पा रहा, उनकी संख्या आधी कर देना.

वॉटर एड ने कहा है कि इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए काम इतनी धीमी रफ़्तार से हुआ है कि लक्ष्य 2049 से पहले पूरा नहीं हो पाएगा यानी तय समयसीमा से लगभग तीन गुना से भी ज़्यादा वक्त लगेगा.

वॉटर एड ने कहा कि अगर एड्स, मलेरिया और खसरा जैसी बीमारियों को मिला लिया जाए तो उसके मुक़ाबले डायरिया से ज़्यादा बच्चों की मौत होती है.

ये सब असुरक्षित पानी और साफ़-सफ़ाई में कमी के कारण होता है.

बुनियादी अधिकार

इसके पहले संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव आया था जिसमें कहा गया था कि स्वच्छ पानी और सफ़ाई की सुविधा अब हर व्यक्ति का बुनियादी अधिकार होना चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक पांच साल से कम उम्र के करीब 15 लाख बच्चे हर साल पानी और साफ़-सफ़ाई की कमी के कारण मर जाते हैं.

चीन, रूस, जर्मनी, फ़्रांस, स्पेन, ब्राज़ील, भारत औऱ पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था.

प्रस्ताव के मसौदे में कहा गया था कि 88 करोड़ 40 लाख लोगों को पीने के लिए साफ़ पानी नहीं मिलता और करीब 2.6 अरब लोगों को शौचालय की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है.

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