‘क़ुरान की प्रतियाँ जलाना धार्मिक आतंकवाद’

कुरान जलाने के ऐलान के बाद दुनिया में कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

अमरीका पर अल क़ायदा के हमले की बरसी पर क़ुरान की प्रतियाँ जलाने की एक चर्च की घोषणा को लेकर मिस्र जैसे देशों का मानना है कि इससे अमरीका के साथ मुस्लिम देशों के रिश्तों पर बेहद बुरा असर पड़ेगा.

इस्लामी सुन्नी समुदाय के बीच मज़बूत पकड़ रखने वाले मिस्र के अल अज़हर विश्वविद्यालय ने अमरीकी सरकार से अपील की है कि वो इस घोषणा के मद्देनज़र जल्द कार्रवाई करे.

विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फ्लोरिडा के चर्च की इस घोषणा को ‘धार्मिक आतंकवाद’ क़रार देते हुए कहा कि अगर ऐसा होता है तो इससे अमरीका और मुस्लिम देशों के बीच रिश्ते बेहद ख़राब हो जाएंगे.

ये ‘धार्मिक आतंकवाद’ है. अगर ऐसा होता है तो इससे अमरीका और मुस्लिम देशों के बीच रिश्ते बेहद ख़राब हो जाएंगे.

वरिष्ठ अधिकारी, अल अज़हर विश्वविद्यालय

क़ुरान की प्रतियाँ जलाने की खबर मिस्र के अखबारों में प्रमुखता से छप रही है. मुस्लिम देशों के लिए ये ख़बर ऐसे समय में आई है जब रमज़ान का पवित्र महीना खत्म होने को है और अमरीका सहित सभी देशों में मुस्लिम आबादी ईद की तैयारी में जुटी है.

इस बीच अमरीकी सरकार की तीखी प्रतिक्रिया के बावजूद 50 सदस्यों वाला ईसाई संगठन 'डव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर' क़ुरान जलाने के अपने फ़ैसले पर अड़ा हुआ है.

कड़ी प्रतिक्रिया

इस फ़ैसले पर लगभग सभी देशों में व्यापक प्रतिक्रिया हुई है. अफ़ग़ानिस्तान, इंडोनेशिया और ईरान में इसके विरोध में प्रदर्शन हुए हैं और विरोध करने वालों ने कहा है कि क़ुरान की प्रतियाँ जलाने पर भारी प्रतिक्रिया होगी.

कुरान जलाना

अफ़ग़ानिस्तान, इंडोनेशिया और ईरान में इसके विरोध में प्रदर्शन हुए.

बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है कि अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी नीतियों के ज़रिए मुस्लिम देशों के बीच अमरीका की छवि को सुधारने की कोशिश की है.

'डव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर’ की इस घोषणा से ओबामा की कोशिशों पर पानी फिर सकता है.

मार्कस का कहना है कि 9/11 हमलों के स्थल ‘ग्राउंड ज़ीरो’ पर इस्लामी सेंटर बनाए जाने की घोषणा के बाद कई विवाद पैदा हुए साथ ही 18 फ़ीसदी से ज़्यादा अमरीकी मानते हैं कि बराक ओबामा खुद एक मुसलमान हैं. इन बातों से ये ज़ाहिर होता है कि अमरीकियों में मुसलमानों को लेकर द्वेष का भाव पनप रहा है.

इस बीच अमरीकी विदेश सचिव हिलेरी क्लिंटन ने इस फ़ैसले को 'अनादर करने वाला और अपमानजनक' ठहराया है जबकि अमरीकी एटोर्नी जनरल एरिक होल्डर ने इसे 'मूर्खतापूर्ण और ख़तरनाक' बताया है.

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