ग़रीबी उन्मूलन में बहानेबाजी नहीं: संयुक्त राष्ट्र

बान की मून
Image caption बान की मून ने कहा कि अमीर देश ग़रीबों की अनदेखी कर अपना बजट न बनाएँ

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने दुनियाभर के नेताओं से कहा है कि वो ग़रीबी कम करने का लक्ष्य हासिल न कर पाने में आर्थिक मंदी का बहाना न बनाएँ.

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के विशेष सम्मेलन में बान की मून ने कहा कि अमीर देश ग़रीबों की अनदेखी कर अपना बजट न बनाएँ.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य 2015 तक हासिल किए जा सकते हैं. साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि वक्त हाथ से निकलता जा रहा है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जो लक्ष्य निर्धारित किए हैं, उनमें मुख्य है कि भूख और ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वालों की संख्या आधी कर देना और ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इसे हासिल किया जा सकता है.

संवाददाता का कहना है कि लेकिन शिशु मृत्यु दर को कम करना और प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देना जैसे लक्ष्य अभी कोसों दूर हैं.

धन की कमी

ये लक्ष्य वर्ष 2000 के सहस्त्राब्दी सम्मेलन में तय किए गए थे.

दरअसल इसमें धन की कमी आड़े आ रही है क्योंकि ग़रीबी और भूख से निपटने के लिए अगले पाँच साल में सौ अरब डॉलर से अधिक धनराशि की ज़रुरत होगी.

ग़ौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसी एक्शन एड ने अपनी एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया अपना वादा निभाने में विफल साबित हो रही है.

उसका कहना है कि भूख की असल वजह खाद्यान्न की कमी नहीं बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है.

एक्शन एड का कहना है कि भूख से निपटने के लिए ग़रीब देशों को हर साल 450 अरब डॉलर ख़र्च कर रहे हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के विकास लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक धनराशि से बहुत अधिक है.

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