डेढ़ अरब लोगों को बिजली नहीं

Image caption भारत की झुग्गियों और गांवों में अभी भी बिजली की सुविधा नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दुनिया की कुल आबादी का पांचवां हिस्सा बिना बिजली के ही जीवन यापन करता है.

संयुक्त राष्ट्र में सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों की रिपोर्ट पेश होने वाली है और इससे पहले आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में 1.4 अरब लोग बिना बिजली के रहते हैं जबकि इसके दुगुने यानी क़रीब तीन अरब लोग अपनी ज़रुरतों के लिए पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर करते हैं.

संयुक्त राष्ट्र ऊर्जा एजेंसी का कहना है कि ये स्थिति शर्मनाक है और अगर दुनिया के इतने बड़े हिस्से को स्वच्छ ईंधन नहीं मिलता है तो 2015 तक ग़रीबी को कम करने के सह्स्राब्दि लक्ष्य को पूरा करना आसान नहीं होगा.

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया, अफ्रीका और कई अन्य एशियाई देशों में लोगों के पास बिजली की सुविधा अभी भी नहीं है.

रिपोर्ट कहती है कि अफ्रीका के कई हिस्सों को मिलाकर क़रीब 80 करोड़ की आबादी है. ( दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर) ये 80 करोड़ लोग मिलकर जितनी उर्जा की खपत करते हैं उतनी ऊर्जा की खपत न्यूयॉर्क में रहने वाले क़रीब बीस लाख लोग ही कर लेते हैं.

इसमें कहा गया है कि अफ्रीका और एशिया के कई हिस्सों में पेट्रोल, डीज़ल और केरोसीन की बढ़ती क़ीमतों के कारण बड़ी संख्या में लोग वापस चारकोल और गोबर से बने उपलों की शरण ले रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार अगर इतनी बड़ी आबादी को बिजली की सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती तो ये सोचना भी मुश्किल है कि किस तरह विकास के लक्ष्यों को पूरा किया जाएगा.

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