सफलता-विफलता के समान अवसर: इसराइली रक्षा मंत्री

एहुद बराक
Image caption एहुद बराक शांति वार्ता की सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं हैं

इसराइल की अपनी बस्तियों पर लगाई गई रोक की अवधि ख़त्म होने को है, राजनयिक इस बात की जोरशोर से कोशिश कर रहे हैं कि इस मामले पर दोनों पक्षों- यानी इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच कोई सुलह हो जाए.

इसराइल के रक्षा मंत्री एहुद बराक ने बीबीसी के साथ एक विशेष बातचीत में कहा है कि सुलह की गुंजाइश 'फ़िफ्टी-फ़िफ्टी' है.

फ़लस्तीनी नेताओं ने कहा है कि अगर इसराइल अपनी बस्तियों पर लगाई गई रोक की अवधि नहीं बढ़ाता है तो वे शांति वार्ता से अलग हो जाएंगे.

उल्लेखनीय है कि 20 महीने रुके रहने के बाद मध्य पूर्व शांति वार्ता इसी महीने शुरू हुई है.

किसी किस्म के समझौता न होने की सूरत में इसराइल में नए बसने वालों ने पश्चिमी तट पर रविवार से निर्माण कार्य की पूरी तैयारी कर रखी है.

लेकिन अमरीकी मध्यस्थों की पूरी कोशिश के बाद भी इस मुद्दे पर किसी तरह की सहमति नहीं बन पाई है.

इसराइल का कहना है कि बातचीत में रुकावट का कोई कारण नहीं है.

इसराइल के रक्षा मंत्री ने बीबीसी को कहा है कि वो अपनी सरकार में मौजूद लोगों को समझौते के लिए तैयार करने की कोशिश करेंगें. लेकिन उनका कहना था कि वो इसकी सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं हैं.

समझौते की उम्मीद

हालांकि वो शांति वार्ता की कामयाबी को लेकर ज्यादा उत्साहित थे और उन्होंने संकेत दिए कि फ़लस्तनियों के साथ बस्तियों पर समझौता होने के पचास फ़ीसदी मौक़े हैं.

रक्षा मंत्री ने कहा कि इन सबके बावजूद बातचीत जारी रहने की उम्मीद पहले से कहीं बेहतर है.

शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने कहा था कि इसराइल को शांति और बस्तियों को जारी रखने में से एक को चुनना होगा.

महमूद अब्बास ने कहा कि फ़लस्तीनी इसराइल के साथ एक व्यापक और न्यायसंगत शांति संधि करने को तैयार है.

उन्होंने महासभा के सामने घोषणा करते हुए कहा कि फ़लस्तीन के लोग अपने 'घायल हाथों' से इसराइल की तरफ दोस्ती का प्रस्ताव पेश कर रहे हैं.

अब्बास का कहना था कि फ़लस्तीनी इस बात की हरसंभव कोशिश करेंगें कि साल के भीतर इसराइल के साथ शांति संधि हो जाए.

उन्होंने इसराइल की ये कहते हुए निंदा की कि वह 'विस्तार और वर्चस्व की मानसिकता से ग्रसित है और गज़ा पट्टी की रुकावट को जारी रखे हुए है.'

लेकिन अब्बास ने खुले तौर पर ये नहीं कहा कि अगर इसराइल अपनी बस्तियों पर लगी रोक की अवधि नहीं बढ़ाता है तो वह बातचीत से अलग हो जाएंगे.

अब्बास की मुश्किलें

बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता का कहना है कि लोगों की नज़रों से दूर इस मामले में समझौते की कोशिशें अब भी जारी हैं.

Image caption अब्बास ने कहा कि अगर इसराइल बस्तियों पर लगी रोक की अवधि नहीं बढ़ाता है तो वो बातचीत से अलग हो जाएंगे

संवाददाता का कहना है कि अगर महमूद अब्बास समझौते की पहल करते हैं तो फ़लस्तनियो के बीच उनकी एक कमज़ोर नेता की छवि और मज़बूत होगी जबकि अगर वो अपनी बात पर अडिग रहते हैं और शांति वार्ता से अलग हो जाते हैं तो उनपर बातचीत में रोड़ा डालने का आरोप लगेगा.

इसराइल बस्तियों पर खुद लगाई गई अवधि स्थानीय समय के अनुसार रविवार को मध्य रात्रि में ख़त्म हो रही है.

इसराइल के दक्षिणपंथी गुट के नेता जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू करवाए जाने की मांग कर रहे हैं.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गुरुवार को इसराइल से बस्तियों पर लगी रोक की अवधि बढ़ने की अपील की थी जो उनके अनुसार 'ज़मीनी स्थिति में परिवर्तन लाएगी और बातचीत की फिजा को बेहतर बनाएगी.'

पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम में चार लाख 30 हज़ार यहूदियों को बसाया गया है.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन बस्तियों को अवैध मानता है लेकिन इसराइल इससे इनकार करता है.

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