'टैक्स की बर्बादी करती हैं सरकारें'

Image caption भारत के नागरिक भी समझते हैं कि टैक्स का अधिकतर धन सार्वजनिक हित में ख़र्च नहीं होता

दुनिया के अधिकतर लोग ये समझते हैं कि जो टैक्स वो देते हैं उसमें से आधे से अधिक राशि उनकी सरकारें ग़लत ढंग से ख़र्च करती हैं.

बीबीसी विश्व सेवा के 22 देशों में किए गए एक सर्वेक्षण से ये भी पता चलता है कि बहुत से लोग चाहते हैं कि सरकार अधिक सक्रिय आर्थिक भूमिका निभाए.

ग्लोब स्कैन और पीपा नामक सर्वेक्षण कम्पनियों के इस सर्वेक्षण में 22,000 लोगों ने भाग लिया.

इसके अनुसार लोग ये मानते हैं कि लगभग 52 प्रतिशत सरकारी धन देश की जनता के हित में ख़र्च नहीं होता.

सरकार में इस अविश्वास के बावजूद इस सर्वेक्षण में पाया गया कि कुछ मामलों में लोग सरकार की अधिक भूमिका चाहते हैं.

कोई 78 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि सरकार खाने पीने की चीज़ों की क़ीमतें कम रखने के लिए सब्सिडी दे. केवल 18 प्रतिशत लोग इससे सहमत नहीं थे.

कोई 67 प्रतिशत सोचते हैं कि राष्ट्रीय आर्थिक ज़रूरतों पर सरकारी निगरानी बढ़नी चाहिए.

कोई 56 प्रतिशत लोग अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए सरकारी ख़र्च में बढ़ोतरी चाहते हैं.

भारत वासियों की सोच

भारतीय नागरिक भी यही समझते हैं कि टैक्स के अनुपात में उनका धन सार्वजनिक हित में ख़र्च नहीं होता.

कोई दो तिहाई लोग बजट घाटे और क़र्ज़ को कम के लिए सरकार का समर्थन करते हैं जो दुनिया के औसत से कहीं अधिक है. दुनिया में यह औसत 51 प्रतिशत है जबकि भारत में 64 प्रतिशत.

अधिकतर करदाता टैक्स बढ़ाने की बजाय सार्वजनिक सेवाओं में कटौती के पक्षधर हैं.

ज़्यादातर लोग सरकारी हस्तक्षेप का समर्थन करते हैं. कोई 61 प्रतिशत लोग सरकारी नियमन के पक्ष में हैं और 77 प्रतिशत बैंको को बचाने के लिए सरकार द्वारा आर्थिक मदद का समर्थन करते हैं जो दुनिया में सबसे अधिक है.

साथ ही अर्थव्यवस्था के नियमन में वो अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अधिक अधिकार दिए जाने के पक्ष में नहीं है.

भारत अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में काफ़ी आशावान है और अधिकतर लोग ये मानते हैं अगले पांच सालों में अच्छा समय आएगा.

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