ब्राज़ील में राष्ट्रपति का फ़ैसला नहीं हो पाया

डिल्मा रौसेफ़ और जोस सेरा
Image caption सत्तारूढ़ दल की महिला उम्मीदवार डिल्मा रौसेफ़ का मुक़ाबला जोस सेरा से है

ब्राज़ील के राष्ट्रपति पद के चुनावों में किसी भी उम्मीदवार को आवश्यक बहुमत यानि कम से कम पचास प्रतिशत वोट नहीं मिल पाए हैं.

ब्राजील के चुनाव अधिकारियों का कहना है कि मतगणना लगभग पूरी हो चुकी है और अब राष्ट्रपति चुनाव के लिए दूसरे चरण का मतदान आवश्यक हो गया है.

सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की उम्मीदवार डिल्मा रौसेफ़ को मज़बूत बढ़त ज़रूर मिली लेकिन पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया है.

दूसरे चरण में उनका मुक़ाबला साओ पावलो के पूर्व गवर्नर जोस सेरा से होगा. दूसरे चरण का मतदान महीने के अंत में होगा.

लूला डिसिल्वा देश के लोकप्रिय राष्ट्रपति रहे हैं लेकिन वो लगातार दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं और ब्राज़ील के संविधान के मुताबिक वो तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ सकते हैं.

लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी की ओर से डिल्मा रौसेफ़ को चुनाव मैदान में उतारा है.

चुनौतियाँ

चुनाव दूसरे चरण में जाने पर राष्ट्रपति लूला डिसिल्वा का कहना था,'' मैं स्वयं भी कभी पहले चरण में नहीं जीता. अगर चुनाव दूसरे चरण में जाता है तो इसका मतलब होगा एक महीने और प्रचार, एक महीने की और लड़ाई जिसमें हमारी पार्टी जीतेगी.''

डिल्मा रौसेफ़ अगर चुनाव जीतती हैं तो वे देश की पहली महिला राष्ट्रपति होंगी.

उल्लेखनीय है कि ब्राज़ील की अर्थव्यवस्था में तेज़ी से प्रगति हो रही है.

जहाँ दुनिया के ज़्यादातर देश अर्थव्यस्था में सुस्ती का सामना कर रहे हैं वहीं ब्राज़ील में भारत की ही तरह ज़ोरदार तेज़ी दिख रही है.

ब्राज़ील की चुनौतियाँ भारत से काफ़ी मिलती-जुलती हैं.

वहाँ तेज़ गति से विकास तो हो रहा है लेकिन आबादी का एक बड़ा हिस्सा अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है.

अगले राष्ट्रपति के समक्ष आधारभूत सुविधाओं का विकास, शिक्षा के स्तर में सुधार और लोगों के लिए नए अवसर पैदा करना जैसी चुनौतियाँ होंगी.

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