'टेस्ट ट्यूब बेबी' देने वाले को नोबेल

रॉबर्ट एडवर्ड के साथ पहली टेस्ट ट्यूब बेबी लुई ब्राउन
Image caption रॉबर्ट एडवर्ड 85 वर्ष के हैं और फ़िलहाल उनकी तबीयत नासाज़ है. इस तस्वीर में उनके साथ है अब 32 साल की हो चुकी दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी लुई ब्राउन.

दुनिया में पहली बार टेस्ट ट्यूब बेबी को जन्म दिलाने वाले डॉक्टर ब्रिटेन के रॉबर्ट एडवर्ड को इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार दिया गया है.

ये पुरस्कार उन्हें मेडिसिन के क्षेत्र में दिया गया है.

रॉबर्ट एडवर्ड ने निस्संतान लोगों की मदद के लिए इन विट्रो फ़र्टिलाइज़ेशन (आईवीएफ़) तकनीक का विकास किया.

1950, 1960 और 1970 के दशक में उन्होंने जो प्रयास किए, उसके परिणामस्वरूप विश्व का पहला टेस्ट ट्यूब बेबी 1978 की जुलाई में पैदा हुआ.

Image caption रॉबर्ट एडवर्ड की मदद से पैदा हुई पहली टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म 1978 में हुआ था.

ये एक लड़की थी और उसका नाम लुई ब्राउन था.

तब से अबतक दुनिया भर में आईवीएफ़ तकनीक से क़रीब 40 लाख बच्चे पैदा हो चुके हैं.

नोबेल पुरस्कार देनेवाली समिति का कहना है कि संतानोत्त्पत्ति में असमर्थता एक ऐसी समस्या है जो विश्व के 10 प्रतिशत दंपतियों को प्रभावित करती है.

और ऐसी समस्या के निदान में जो अभूतपूर्व योगदान रॉबर्ट एडवर्ड ने दिया है, इसके लिए उन्हें मेडिसिन के क्षेत्र में इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार दिया गया.

योगदान

प्रोफ़सर एडवर्ड 85 वर्ष के हैं और इस समय बीमार हैं. उन्होंने अपना शोध 50 साल पहले शुरू किया था.

उस शोध की सफलता का ही परिणाम है कि आज आईवीएफ़ तकनीक से गर्भ धारण करने वाले हर पाँच दंपति में से एक अपने प्रयास में सफल होता है.

सामान्य तरीके से बच्चा पैदा करने के तरीके में भी सफलता की दर यही है.

प्रोफ़सर एडवर्ड के सहयोगी पैट्रिक स्टेपटो ने इस शोध में उनका साथ दिया और इनके प्रयासों को चर्च और कई सरकारों का विरोध भी झेलना पड़ा था.

विज्ञान के क्षेत्र के उनके कई सहयोगियों को भी इस शोध की सफलता को लेकर शक था और स्थिति ये हो गई थी कि अपना शोध करने के लिए उन्हें पैसों की भी कमी पड़ी जिसके लिए उन्हें निजी सहायता राशि पर निर्भर रहना पड़ा.

लेकिन हर मुसीबत को पार कर उन्होंने जो कर दिखाया उसे आज नोबेल एसेंबली मील का पत्थर मानती है.

नोबेल एसेंबली का कहना है कि "प्रोफ़ेसल एडवर्ड ने जो सपने देखे, आज वो यथार्थ बन चुके हैं और वो दुनिया भर के उन हज़ारों दंपतियों को ख़ुशियाँ दे रहे हैं जिन्हें प्रजनन संबंधी दिक़्कतें होती हैं."

इन विट्रो फ़र्टिलाइज़ेशन

इन विट्रो फ़र्टिलाइज़ेशन (आईवीएफ़) एक ऐसी तकनीक है जिसके तहत उन दंपतियों का इलाज होता है जो संतान को जन्म दे पाने में या तो असमर्थ होते हैं या फिर जिन्हें संतानोत्त्पत्ति में दिक़्कत होती है.

आईवीएफ़ के अंतर्गत महिला के अंडाणु (ऐग सेल) और पुरूष के शुक्राणु (स्पर्म) को शरीर के बाहर, एक टेस्ट ट्यूब या किसी बीकर में निषेचित यानि फ़र्टिलाइज़ किया जाता है.

उसके बाद इस फ़र्टिलाइज़्ड अंडे (ज़ाइगोट) को महिला के बच्चेदानी (युट्रस) में स्थापित किया जाता है, इस उम्मीद के साथ कि नौ महीने बाद एक स्वस्थ शिशु पैदा होगा.

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