ड्रोन हमले यूरोप पर चरमपंथी हमला रोकने के लिए

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Image caption सूत्रों का कहना है कि ड्रोन हमले यूरोप में चरमपंथियों की योजनाओं को नाकामयाब करने के लिए किए गए हैं.

पाकिस्तान पर अमरीकी ड्रोन हमलों की संख्या इस साल और ख़ास तौर पर पिछले कुछ हफ़्तों में काफ़ी बढ़ गई है. वॉशिंगटन में सूत्रों का कहना है कि इनमें से कुछ मिसाइल हमले यूरोप पर हमलों की योजनाओं को छिन्न भिन्न करने के सिलसिले में किए गए हैं.

इनमें सोमवार पाकिस्तान के मीर अली शहर में हुआ वो मिसाइल हमला भी शामिल है जिसमें कुछ जर्मन नागरिक मारे गए थे.

जर्मनी से निकलने वाले चरमपंथियों की संख्या में इस बीच काफ़ी बढ़ोत्तरी हुई है और इनमें वो क़रीब 12 लोग शामिल हैं जिनका संबंध 11 सितंबर के हमलों की योजना से जुड़ी एक मस्जिद से बताया जाता है.

इस समूह से जुड़े एक व्यक्ति अहमद सिद्दीक़ी को इन गर्मियों में गिरफ़्तार किया गया था. अमरीकी अधिकारियों ने उससे पूछताछ के आधार पर नतीजा निकाला कि यूरोप के शहरों में बंदूक़ों के ज़रिए कमांडो स्टाइल में अंधाधुंध गोलीबारी करने की योजना बनाई गई है.

यूरोप से जुड़े तार

वॉशिंगटन में पाकिस्तान के राजदूत ने ड्रोन हमलों और यूरोप में सतर्कता बढ़ाए जाने के बीच संबंध की पुष्टि की है. अमरीकी विदेश विभाग के पीजे क्रॉली ने बीबीसी को बताया है कि ख़तरे से निपटने की कोशिश में ड्रोन हमले किए गए थे.

क्रॉली ने कहा, “स्पष्ट है कि पिछले कुछ घंटों और दिनों में जैसी गतिविधियाँ आपने देखी हैं उसका सीधी संबंध उस ख़तरे से है जिसे यूरोप और अमरीका झेल रहा है. ये ख़तरा पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के चरमपंथियों से है साथ ही ऐसे तत्वो से भी ख़तरा है जो यूरोप और अमरीका में ही रहते हैं.”

इस सिलसिले में और भी ख़ुफ़िया जानकारी मिलने का दावा किया गया है लेकिन जर्मनी और ब्रिटेन के अधिकारी मानते हैं कि ऐसा हमला बहुत जल्दी होने की आशंका नहीं है.

कहा गया है कि फ़्रांस को भी हमले का निशाना बनाया जा सकता है. उसे पहले से ही उत्तरी अफ़्रीक़ा से हमले की आशंका है. आज ही फ़्रांसीसी पुलिस ने 12 लोगों को चरमपंथियों से संबंध होने की आशंका में गिरफ़्तार किया है.

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