नोबेल पुरस्कार विजेता को रिहा करें: ओबामा

लू श्याबाओ

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चीन से नोबेल शांति पुरस्कार विजेता लू श्याबाओ को जल्द से जल्द रिहा करने को कहा है.

राष्ट्रपति ओबामा का कहना है कि चीन में राजनीतिक सुधारों की गति आर्थिक प्रगति की तेज रफ़्तार के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही है.

यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जोस मैनुएल बरोसो ने कहा कि लू श्याबाओ को पुरस्कार दिया जाना दुनियाभर में स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे लोगों के लिए एक संदेश है.

तिब्बत के निर्वासित नेता दलाई लामा ने कहा कि ये पुरस्कार चीन में राजनीतिक सुधार के लिए उठती आवाज़ों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मान्यता है.

उल्लेखनीय है कि इसके पहले चीनी नीतियों के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने वाले लू श्याबाओ को नोबेल शांति पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया था.

जेल में लू श्याबाओ

लू श्याबाओ चीन के जेल में 11 साल की सज़ा काट रहे हैं.

ऑस्लो में नोबेल समिति का कहना था कि लू श्याबाओ 20 वर्षों से मानवाधिकारों कर रहे हैं.

चीन में उनकी गिरफ़्तारी एक ऐसा दस्तावेज़ लिखने के लिए हुई थी जिसमें उन्होंने मानवाधिकारों की बेहतरी और राजनीतिक सुधारों की मांग की थी.

चीन की सरकार ने इस पुरस्कार की घोषणा से पहले ही अपना लिखित विरोध प्रकट किया था.

चीन ऐसे लोगों को पुरस्कार देने के ख़िलाफ़ नार्वे स्थित नोबेल समिति को लगातार ये कहकर चेतावनी देता रहा है कि ये नोबेल शांति पुरस्कार के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ होगा और इससे नार्वे और चीन के रिश्तों पर असर पड़ेगा.

नोबेल समिति नार्वे की सरकार के अधिकारक्षेत्र से बाहर है और उसका कहना है कि वो किसी पक्ष के दबाव से नहीं प्रभावित होते.

वर्ष 1989 में भी जब उन्होंने दलाई लामा को नोबेल शांति पुरस्कार दिया था तो चीन ने उसकी कड़ी आलोचना की थी.

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