खदान में फंसे खनिकों को निकालने की तैयारी

चिली में  खदान में फंसे खनिकों को निकालने की कोशिश
Image caption कैप्सूल का सफल परीक्षण

चिली में पाँच अगस्त से एक खदान में फंसे 33 खनिकों को बाहर निकालने का काम भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे से शुरु होगा.

चिली के खदान मंत्री लॉरेंस गोलबोर्न के अनुसार खनिकों को बाहर निकालने के लिए इंजीनियरों के बनाए गए एक कैप्सूल का परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है जिससे अब फंसे हुए खनिकों की उम्मीदें जाग गई हैं.

चिली की सैन होज़े खदान के पास एकत्र हुए खनिकों के रिश्तोंदार के बीच उत्साह की लहर दौड़ गई है.

फँसे हुए खनिकों के परिजन बेसब्री से अपने परिवार के सदस्यों का इंतज़ार कर रहे हैं. दो दिन पहले जब खनिकों को बाहर निकालने में जुटे इंजीनियर भूमिगत चैंबर को तोड़कर खनिकों तक पहुँचे तो खनिकों के परिवार वाले खुशी से झूम उठे थे और उन्होंने एक दूसरे को गले लगाया था.

'इंतज़ार होगा ख़त्म'

अब इन व्याकुल परिजनों का इंतज़ार खत्म होने को है क्योंकि खनिकों को बाहर निकालने के लिए उस विशेष कैप्सूल का परीक्षण सफल रहा है जिसे इंजीनियरों ने तैयार किया था.

ये खनिक गत पाँच अगस्त से खदान के धँसने के बाद से ज़मीन से 700 मीटर नीचे फँसे हुए हैं.

ज़मीन के नीचे 69 दिनों से फँसे हुए खनिकों को निकालने के लिए न केवल कैप्सूल का परीक्षण सफल हो चुका है बल्कि उन्हें बाहर निकालने के लिए बनाया गया शाफ़्ट भी पूरी तरह से तैयार है.

चिली के खदान मंत्री लॉरेंस गोलबोर्न ने कहा कि इन खनिकों को बाहर निकालने की तैयारी पूरी तरह से हो चुकी है.

उन्होंने कहा कि, ''फंसे हुए खनिकों को निकालने के लिए बनाए गए उपकरणों का परीक्षण सफल रहा है. हमने खदान के अंदर टीवी कैमरे उतारे हैं और इस प्रक्रिया के दौरान कोई भी दिक्कत नहीं आई. तो हमें विश्वास है कि हम इस स्टील के ढांचे को आराम से नीचे उन तक पहुंचा पाएंगें.''

साथ ही गोलबोर्न ने चेतावनी दी है कि बचाव दल को सावधानी से काम करना होगा जिससे कि ड्रिल जाम न हो. कहा जा रहा है कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खनिकों को हर घंटे एक-एक कर बाहर निकाला जाएगा.

Image caption खदान में फंसे खनिकों के परिवार वाले बेसब्री से उनके सकुशल वापसी का इंतज़ार करते हुए.

सबसे पहले उन खनिकों को निकाला जाएगा जो मानसिक रुप से सबसे ज़्यादा मज़बूत और अनुभवी होंगे ताकि बचाव के शुरुआती प्रयासों में कोई दुर्घटना होने पर वो इसका सामना कर सके.

बाहर निकाले जाने के बाद उन्हें ठोस आहार नहीं दिया जाएगा. उन्हें केवल पेय पदार्थ ही दिए जाएंगें.

बचाव कार्य में जुटे एक चिकित्सक सलाहकार बैन मौरिस ने बताया कि फंसे हुए ये खनिक स्वस्थ हैं. "मेरे हिसाब से मानसिक तनाव और चिंता इन लोगों के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है. लेकिन ये सभी काफी मज़बूत लोग हैं और मुझे नहीं लगता कि उन्हें अब कोई परेशानी होगी."

बाहर निकलने पर खनिकों को धूप के चश्मों की तरह गहरे रंग के काँच वाले चश्मे भी दिए जाएँगे क्योंकि वे लंबे समय से अंधेरे में रह रहे हैं और बाहर की रोशनी अचानक बर्दाश्त नहीं कर सकेंगे.

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