समलैंगिक फ़ौजियों के पक्ष में बड़ा फैसला

अमरीकी सैनिक
Image caption अमरीकी सेना प्रमुख ने समलैंगिकों के पक्ष में हैं

एक अमरीकी जज ने ज़ाहिर तौर पर समलैंगिक लोगों के सेना में भर्ती पर लगी देशव्यापी रोक को अमल में लाने से रोक दिया है.

अमरीका की एक ज़िला जज वर्जीनिया फ़िलिप्स ने पिछले महीने दिए गए अपने एक फ़ैसले में कहा है कि सरकार की 'पूछो नहीं-बताओ नहीं' की नीति असंवैधानिक है.

'पूछो नहीं-बताओ नहीं' के तहत किसी सैनिक से यह नहीं पूछा जाता कि यौन संबंधों को लेकर उसकी प्राथमिकता क्या है और ना ही उसे स्वंय इसकी जानकारी देनी होती है.

इसका मतलब यह है कि समलैंगिक लोग सेना में काम कर सकते हैं लेकिन अगर ये बात सार्वजनिक होती है तो उस सैनिक की नौकरी बर्खास्त की जा सकती है. इसलिए समलैंगिक सैनिकों को ये जानकारी गुप्त रखनी होती है.

अमरीकी न्याय विभाग के पास इसके ख़िलाफ़ अपील करने के लिए 60 दिनों का समय है लेकिन उसने ऐसी कोई अपील नहीं की है.

17 साल पुरानी नीति

पिछले महीने वॉशिंगटन प्रांत की एक संघीय अदालत ने भी इस प्रतिबंध को असंवैधानिक क़रार दिया था.

उस फ़ैसले में जज ने वायुसेना को आदेश दिए थे कि 'पूछो नहीं-बताओ नहीं' की नीति के तहत बर्खास्त की गई एक नर्स को बहाल किया जाए.

इस बीच अमरीकी सैन्य मंत्रालय पेंटागन अध्ययन कर रहा है कि किस तरह से समलैंगिक लोगों को सेना में काम करने दिया जा सकता है. पेंटागन को इस साल के अंत तक अपनी रिपोर्ट पेश करनी है.

'पूछो नहीं-बताओ नहीं' की नीति को 1993 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने लागू किया था.

राष्ट्रपति बराक ओबामा और कुछ सैन्य अधिकारी चाहते हैं कि इस क़ानून को बदल दिया जाए. राष्ट्रपति ओबामा कह चुके हैं कि वे सेना में समलैंगिकों के भर्ती के पक्ष में हैं. उनकी सरकार ने अमरीका के निचले सदन में एक विधेयक पारित किया था लेकिन सीनेट में यह पारित नहीं हो सका.

अदालत में याचिका लॉग केबिन रिपब्लिकन समूह ने दायर की थी. यह समूह उन सैन्य कर्मियों के लिए काम करता है जो ज़ाहिर तौर पर समलैंगिक हैं और 'पूछो नहीं-बताओ नहीं'नीति के तहत बर्खास्त कर दिए गए हैं.

समलैंगिकों की सेना में भर्ती पर रोक का समर्थन करने वाले लोगों का कहना है कि यदि इसकी अनुमति दी गई तो सेना का मनोबल गिरेगा.

जज फ़िलिप्स ने पिछले महीने सुनवाई के बाद 'पूछो नहीं-बताओ नहीं' की नीति को को असंवैधानिक घोषित कर दिया था.

लेकिन इस रोक को ख़ारिज करते हुए जज ने राष्ट्रपति ओबामा के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि इससे योग्य सैन्य कर्मियों को या तो झूठ बोलना होता है या फिर सेना में अपनी सेवाओं से ही हाथ धोना पड़ता है.

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन, इसराइल और दर्जनों अन्य देश समलैंगिकों को सेना में भर्ती की अनुमति देते हैं.

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