तमिलों का सोना लौटाने की मांग

तमिल शरणार्थी
Image caption तमिल शरणार्थियों की स्थिति को लेकर दुनिया भर में चिंता व्यक्त की गई है

श्रीलंका के एक राजनेता ने मांग की है कि पिछले साल तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ हुए युद्ध के आख़िरी चरण के दौरान तमिलों से ज़ब्त किए गए सोने और आभूषण को सरकार वापस लौटाए.

मानो गणेशन नाम के ये राजनेता एक मानवाधिकार समूह के नेता भी हैं. इनकी मांग ऐसे समय आई है जब सरकार ने वन्नी क्षेत्र में सेना की ओर से इकट्ठा किए गए सोने के आभूषणों का ब्यौरा दिया है.

मिली जानकारी के मुताबिक़ आभूषणों का वज़न 110 किलोग्राम है और इनकी क़ीमत 44 लाख डॉलर है.

जानकारी के मुताबिक़ इन आभूषणों को देश के केंद्रीय बैंक को सौंप दिया गया है.

पड़ताल

गणेशन ने मांग की है कि इन आभूषणों को उचित जांच पड़ताल के बाद उनके सही हक़दारों को सौंप दिया जाए.

बीबीसी तमिल से बातचीत में उन्होंने कहा, "तमिल चीतों की ओर से संचालित बैंक से ये आभूषण क़ब्ज़े में लिए गए होंगे."

तमिल लोगों ने ख़ासतौर पर ग़रीबों ने अपने गहने मुसीबत के समय ज़रूरत को पूरा करने के लिए उस बैंक के पास गिरवी रखे जिसका संचालन तमिल टाइगर करते थे.

उन्होंने कहा, "सरकार ने क़रीब 8,000 पूर्व विद्रोहियों और नेताओं को बंदी बनाया है. इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो बैंक का संचालन करते थे."

गणेशन ने कहा कि सरकार विस्थापित तमिलों से उन लोगों की संख्या तय करने के लिए कहें जिन्होंने युद्ध के दौरान अपने आभूषण खो दिए.

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