'भारत का साथ दे अमरीका'

मनमोहन सिंह और बराक ओबामा
Image caption रिपोर्ट कई अहम सुझाव दिए गए हैं.

एक अमरीकी थिंक टैंक का कहना है कि अगर अमरीका को भारत के साथ अपने सामरिक रिश्तों को पुख़्ता करना है तो उसे भारत के संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्य बनने की कोशिशों की हिमायत करनी चाहिए.

सेंटर फ़ॉर अ न्यू अमैरीकन सिक्यूरीटी नामक थिंक टैंक के ज़रिए तैयार की गई ‘ब्लूप्रिंट फ़ॉर द फ़्यूचर ऑफ़ यूएस-इंडिया रिलेशंस’ नाम की इस रिपोर्ट में दोनों देशों के बीच संबंधों को मज़बूती प्रदान करने के कई क़दम सुझाए हैं.

इस रिपोर्ट को रिचर्ड आर्मिटाज, निकोलस बर्न और रिचर्ड फ़ोटेंन ने तैयार किया है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए भारत की हिमायत के अलावा एक अन्य अहम सुझाव ये है कि इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइज़ेशन यानि इसरो की सहायक कंपनियों को अमरीका अपनी ‘एंटिटी लिस्ट’ से हटा दे.

अमरीका की ‘एंटिटी लिस्ट’ में उन विदेशी व्यवसायों, संस्थानों और व्यक्तियों के नाम होते हैं जिन्हें कुछ तय वस्तुओं के निर्यात या हस्तांतरण के लिए ‘विशिष्ट लाइसेंस’ लेने पड़ते हैं.

मुबंई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग में बढ़ोतरी हुई है और इस संबंध में जुलाई 2010 में औपचारिक समझौता भी हुआ है.

रिपोर्ट कहती है कि भारत और अमरीका को आतंकवादी ख़तरों के प्रति अपनी रणनीति को कारगर बनाए रखने के लिए ये सहयोग जारी रखनी चाहिए.

सुरक्षा परिषद में भारत की हिमायत

रिपोर्ट के अनुसार अमरीका को भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनने के प्रयासों का खुलकर समर्थन करना चाहिए.

रिपोर्ट कहती है कि यूएन की सुरक्षा परिषद साफ़ तौर से आज की दुनिया में शक्ति के वितरण को नज़रअंदाज़ करती है.

भारत अमरीका संबंधों के भविष्य का ख़ाका खींचती ये रिपोर्ट कहती है कि सुरक्षा परिषद भारत के ‘वैश्विक ताक़त के स्टेट्स’ के साथ न्याय नहीं करती.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-अमरीका द्विपक्षीय संबंधों के केंद्र में क्षेत्रीय मुद्दों पर खुलकर और बेबाक बातचीत होनी चाहिए.

रिपोर्ट के अनुसार भारत और अमरीका के बीच पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान पर परिचर्चा अब तक नाकाफ़ी रही है, इसलिए दोनों देशों को क्षेत्र में ऐसे मुद्दों की पहचान करनी चाहिए जिनपर दोनों मिलकर काम कर सकें.

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में सत्ता के सतुंलन को बनाए रखना भारत और अमरीका दोनो के हित में है.

रिपोर्ट में लिखा है, “दोनों ही देश चीन को नियंत्रित नहीं करना चाहते लेकिन दोनो लोकतांत्रिक देशों की क्षेत्र में मज़बूत मौजूदगी से चीन के शांतिपूर्वक उदय की उम्मीद बढ़ सकती है.”

उच्च प्रौद्योगिकी में निर्यात पर नियंत्रण

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2001 में भारत पर से अमरीकी प्रतिबंध तो हटाने के बाद उच्च-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वृद्धि हुई लेकिन इस क्षेत्र में अब भी कुछ दिक़्क़तें मौजूद हैं.

रिपोर्ट में ‘इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइज़ेशन’ यानि इसरो की सहायक कंपनियों को अमरीका की ‘एंटिटी लिस्ट’ से हटाने का सुझाव दिया है.

इसके अलावा कुछ अन्य संगठनों को भी इस सूची से मुक्त करने की सिफ़ारिश की है.

ये सुझाव देते हुए रिपोर्ट में लिखा है कि भारत अब सैन्य और असैन्य परमाणु गतिविधियों को अलग कर रहा है और साथ ही बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु हथियारों के कार्यक्रमों को भी एक दूसरे से अलग रख रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका को भारत पर परमाणु अप्रसार संधि यानि एनपीटी में शामिल होने के लिए कहना बंद कर देना चाहिए.

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को एनपीटी में शामिल होने के लिए कहने के बजाय, अमरीका की नीति भारत को ऐसे नियम और क़ानून बनाने के लिए उत्साहित करने की होनी चाहिए जिनका पालन एनपीटी के सदस्य देश करते हैं.

रिपोर्ट में अमरीका और भारत से दुनिया के उन हिस्सों में लोकतंत्र के प्रसार करने का आहवान किया गया है जहां ये अब तक अस्तित्व में नहीं आ पाया है.

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