सद्दाम के सहयोगी तारिक़ अज़ीज़ को मौत की सज़ा

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इराक़ के पूर्व उप प्रधानमंत्री और सद्दाम हुसैन के सहयोगी रहे तारिक़ अज़ीज़ को मौत की सज़ा सुनाई गई है. ये सज़ा इराक़ के सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई.

अमरीका के नेतृत्व में इराक़ पर 2003 में हुए हमले के बाद से ही वे जेल में बंद हैं. इराक़ी टीवी का कहना है कि तारिक़ अज़ीज़ को मौत की सज़ा धार्मिक पार्टियों पर जु़ल्म करने के आरोप में दी गई है.

तारिक़ अज़ीज़ के बेटे ज़ायद अज़ीज़ ने बीबीसी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "मैं इसी फ़ैसले की अपेक्षा कर रहा था. वे पिछली सरकार से जुड़े सभी लोगों को मार देना चाहते हैं".

उन्होंने कहा, "मेरे पिता के हाथों पर किसी का ख़ून नहीं है. वह राजनीतिज्ञ हैं उनका सुरक्षा मामलों से कुछ लेनादेना नहीं था. उनके मामले में कोई वकील नहीं था. उन्हें अपनी सफ़ाई देनी की भी अनुमति नहीं दी गई".

ज़ायद अज़ीज़ ने कहा, "यह सरकार का विकीलीक्स की ओर से ध्यान बंटाने की एक कोशिश है. इस फ़ैसले के पीछे सरकार और ख़ासतौर पर अल मलिकी का हाथ है".

सरकार का चेहरा

बताया जा रहा है कि तारिक़ अज़ीज़ गंभीर रूप से बीमार हैं. वह सद्दाम हुसैन शासनकाल के दौरान उस सरकार का चेहरा माने जाते थे.

इससे पहले वर्ष 2009 में तारिक़ अज़ीज़ को एक अन्य मामले में 15 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी. मुनाफ़ाख़ोरी के आरोप में 42 व्यापारियों को मौत की सज़ा दिए जाने के मामले में उन्हें दोषी पाया गया था. हालांकि उन्होंने इस आरोप से इनकार किया था.

मेरे पिता के हाथों पर किसी का ख़ून नहीं है. वह राजनीतिज्ञ हैं उनका सुरक्षा मामलों से कुछ लेनादेना नहीं था. उनके मामले में कोई वकील नहीं था. उन्हें अपनी सफ़ाई देनी की भी अनुमति नहीं दी गई. यह सरकार की विकीलीक्स की ओर से ध्यान हटाने की चाल है.

तारिक़ अज़ीज़ के बेटे ज़ायद

ईसाई समुदाय के अज़ीज़ ने 2003 में अमरीकी सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था.

इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को वर्ष 2006 में बग़दाद में फाँसी दे दी गई थी. वे दो दशक से ज़्यादा समय तक इराक़ के शासक रहे.

सद्दाम के सहयोगी

पिछले कुछ वर्षों से इराक़ में सद्दाम हुसैन के कई सहयोगियों पर मुकदमे चले हैं या सज़ा दे दी गई है.

पूर्व इराक़ी उपराष्ट्रपति ताहा यासीन रमादान को 2007 में फाँसी दी गई थी. सद्दाम हुसैन के सहयोगी रहे रमादान पर 80 के दशक में सौ से अधिक शिया मुसलमानों को मारने का आरोप था.

सद्दाम के सौतेले भाई बारज़ान अल-तिकरिति और पूर्व मुख्य न्यायाधीश अवाद अल-बंदर को भी 2007 में फाँसी की सज़ा दी गई थी.

इस साल के शुरु में सद्दाम हुसैन के चचेरे भाई अली हसन अल-माजिद यानी केमिकल अली को भी फाँसी दे दी गई. उन्हें 1988 में कुर्दों की सामूहिक हत्या का दोषी पाया गया था.

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