पहली बार सामने आए मिस्टर 'सी'

सर जॉन सॉवर्स
Image caption एमआई-6 के 100 वर्षों के इतिहास में पहली बार सामने आए संगठन के प्रमुख

ब्रिटेन की विदेशी ख़ुफ़िया सेवा एमआई-6 के किसी प्रमुख ने संगठन के 100 वर्षों के इतिहास में पहली बार सार्वजनिक रूप से बाहर आकर कोई बात की है.

ब्रिटेन में सत्ता के गलियारों में अब तक केवल – सी – के नाम से पहचाने जानेवाले 55 वर्षीय एमआई-6 प्रमुख सर जॉन सॉवर्स को पहली बार सार्वजनिक रूप से लंदन में सोसायटी ऑफ़ एडीटर्स नामक संस्था की एक बैठक में देखा गया.

वहाँ उन्होंने ख़ुफ़िया सेवाओं की उपयोगिता पर पत्रकारों और विद्वजनों के एक समूह के सामने भाषण दिया जिसका सीधा प्रसारण किया गया.

सर जॉन सॉवर्स ने इस सभा में अपने संगठन को गोपनीय रखे जाने की हिमायत की और यातना देने के तरीक़े को ‘अवैध और घृणास्पद’ बताया.

सर सॉवर्स ने कहा कि उनके संगठन को अक्सर ऐसी ख़ुफ़िया जानकारियों को नज़रअंदाज़ करने के लिए असमंजस वाली स्थिति का सामना करना पड़ा है जो कि ज़ोर-ज़बरदस्ती से हासिल की गई है.

उन्होंने कहा,"यदि हमें लगता है कि हमारी किसी कार्रवाई के दौरान किसी को यातना देनी पड़ सकती है तो ब्रिटेन और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के हिसाब से हमारे लिए आवश्यक है कि हम ऐसा ना करें, और हम ऐसा करते हैं, ये जानते हुए भी कि इससे आतंकवादी कार्रवाई को नहीं रोका जा सकता.

"कुछ लोग इसपर सवाल उठा सकते हैं. मगर हमारा मत स्पष्ट है कि ये बिल्कुल सही क़दम है. इससे हम दूसरे ऐसे तरीक़ों की खोज के लिए और प्रयास कर सकते हैं, जो मानवाधिकारों का पालन करते हों और जिनसे वो परिणाम हासिल किए जा सकते हैं जो हम चाहते हैं."

गोपनीयता

सर सॉवर्स ने कहा कि आतंकवादी ख़तरों का सामना करने के लिए ये आवश्यक है कि एमआई-6 के एजेंटों और दूसरी ख़ुफ़िया सेवाओं की गोपनीयता की रक्षा की जाए.

उन्होंने कहा,"गोपनीयता कोई गंदा शब्द नहीं है. गोपनीयता किसी घटना को छिपाने के लिए नहीं की जाती. गोपनीयता ब्रिटेन और सुरक्षित रखने में एक अहम भूमिका निभाती है.

"ख़ुफ़िया संगठनों को ख़ुफ़िया ही रहना चाहिए, इसके बावजूद कि बीच-बीच में हमें सामने आना पड़े, जैसा कि मैं आज कर रहा हूँ. यदि हमारे काम-काज के तरीक़े सार्वजनिक हो गए तो वे कारगर नहीं रहेंगे. एजेंट जोखिम उठाते हैं.

"वे हमारे लिए काम नहीं करेंगे, हमें वो ख़ुफ़िया जानकारियाँ नहीं देंगे, यदि उन्हें हमपर भरोसा ना हो कि हम उनकी पहचान नहीं प्रकट कर देंगे. हमारे विदेशी सहयोगियों को ये भरोसा चाहिए कि वे जो हमें बताते हैं वह गुप्त रहने जा रहा है, कुछ समय के लिए नहीं, बल्कि हमेशा के लिए."

कश्मीर का ज़िक्र

Image caption एमआई-6 प्रमुख से पहले जॉन सॉवर्स संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के स्थायी दूत रह चुके हैं

सर जॉन ने अपने भाषण में आतंकवाद के विषय पर वक्तव्य रखते हुए उदाहरण के तौर पर कश्मीर का भी नाम गिनाया.

उन्होंने कहा कि आतंकवाद की किसी घटना के लिए किसी एक कारण का नाम नहीं लिया जा सकता.

उन्होंने कहा,"कुछ लोग इसके लिए फ़िलीस्तीन, कश्मीर या इराक़ जैसे राजनीतिक मुद्दों को दोषी ठहराते हैं. कुछ आर्थिक विपन्नता, इस्लाम के साथ छेड़छाड़, पुरूषों की दादागिरी के भाव को तो कोई कुछ देशों में दूसरी तरह की समस्याओं को गिनाते हैं. तो इसके कई कारण गिनाए जा सकते हैं."

व्यक्तित्व

एमआई-6 का प्रमुख बनने से पहले सर जॉन सॉवर्स संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के स्थायी प्रतिनिधि थे.

उसके पहले वे विदेश मंत्रालय में राजनीतिक निदेशक, बग़दाद में दूत और पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के सलाहकार रहे थे.

वे वाशिंगटन में ब्रिटिश दूतावास में काम करने के अलावा काहिरा और दक्षिण अफ़्रीका में राजदूत रह चुके हैं.

उन्होंने बताया कि एमआई-6 प्रमुख के रूप में सबसे कठिन काम रोज़ाना मिलनेवाली ख़ुफ़िया रिपोर्टों को पढ़ने का काम है.

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