सबसे कम उम्र कैदी को 40 साल की सज़ा

उमर
Image caption उमर की अपील के तहत सज़ा पूरी करने बाद उन्हें वापस कनाडा भेज दिया जाएगा.

अमरीका के एक सैन्य ट्रिब्युनल ने अमरीकी सैनिक की हत्या और चरमपंथी गतिविधियों में शामिल रहने के जुर्म में ग्वानतानामो बे के सबसे कम उम्र के कैदी को 40 साल की सज़ा सुनाई है.

कनाडाई मूल के उमर ख़द्र को 15 वर्ष की उम्र में गिरफ़्तार किया गया था.

अब 24 वर्ष के हो चुके उमर की अपील पर ट्रिब्युनल ने उनकी सज़ा आठ साल कर दी है.

सात सदस्यीय सैन्य समिति ने दो दिन तक नौ घंटे की सुनवाई के बाद अपना फ़ैसला सुनाया.

उमर ने अपना जुर्म कबूल करते हुए अपने खिलाफ लगाए गए पांच आरोपों को स्वीकार किया. इसमें अल क़ायदा चरमपंथियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचने और युद्ध संबंधी कानूनों का उल्लंघन कर हत्याएं करने जैसे आरोप शामिल हैं.

उमर की अपील के तहत सज़ा पूरी करने बाद उन्हें वापस कनाडा भेज दिया जाएगा.

पहला देश

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमरीका पहला ऐसा देश है जिसने युद्ध अपराधों के लिए बनाए गए ट्रिब्युनल के ज़रिए किशोरावस्था में किए गए अपराध के लिए किसी कैदी को सज़ा सुनाई हो.

फ़ैसला सुनाए जाने के बाद उमर के हाथों मारे गए सैनिक क्रिस्टोफर स्पीयर की विधवा ने अपनी खुशी ज़ाहिर की.

उमर ने ट्रिब्युनल के सामने दाखिल अपनी अपील में ये स्वीकार किया था कि वो किसी संगठित सैन्य बल का हिस्सा नहीं थे. इसके चलते युद्ध अपराधों के लिए बनाए गए जेनेवा नियमों के तहत उन्हें रियायत नहीं मिल सकती.

उमर मूलत: टोरंटों के रहने वाले हैं और अपने पिता के साथ पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में रह चुके हैं.

लादेन से संपर्क

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि वो अल क़ायदा के लिए काम करने वाले प्रमुख चरमपंथियों में से एक थे और उनका संपर्क ओसामा बिन लादेन से था.

अपनी अपील में उमर ने कहा है कि उनके पिता ने उन्हें बताया था कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में नौजवानों को दिए जा रहे प्रशिक्षण यहूदियों पर हमले करने के लिए है.

उमर ने लिखा, ''मुझे बताया गया था एक अमरीकी को मारने के लिए 1500 डालर का पुरस्कार है. इस पुरस्कार के बारे में जानने के बाद मैं बहुत से अमरीकियों को मारना चाहता था और ढेर सा पैसा कमाना चाहता था.''

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