दक्षिण एशिया से आया हैज़े का जीवाणु

हैती
Image caption हैती में फैले हैज़े को लेकर नेपाल से आया दल लोगों के निशाने पर है

अमरीकी स्वास्थ्य आधिकारियों का कहना है कि हेती में 330 से भी ज़्यादा लोगों की जान लेने वाला हैज़े का घातक जीवाणु दक्षिण एशिया से आया है.

अमरीका के रोग नियंत्रक विभाग के अनुसार हेती के ज़्यादातर मरीज़ जिस जीवाणु से संक्रमित हैं वो दक्षिण एशिया में पाए जाने वाले जीवाणु से मिलता जुलता है.

हेती के स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार इस बात की उम्मीद काफी कम है कि हैज़े की इस महामारी की शुरुआत हेती से हुई हो.

संयुक्त राष्ट्र में इस बात की भी जांच की जा रही है कि यह महामारी नेपाल से आए शांति दूतों के ज़रिए हेती पहुंची है.

बीमारी का कारण

स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर एलैक्स लारसेन का कहना है कि हैज़े के इस जानलेवा जीवाणु और बीमारी फैलने के कारणों का सामने आना मुश्किल है.

उन्होंने कहा, ''जांच और परीक्षण के नतीजे दिखाते हैं कि हैज़े का ये जीवाणु हेती से नहीं उपजा. वैश्विक स्तर पर व्यापार और आवाजाही के चलते यह जीवाणु एक जगह से दूसरी जगह फैलते रहते हैं.''

हेती में फैले हैज़े को लेकर नेपाल से आया दल लोगों के निशाने पर है क्योंकि हेती में आमतौर पर हैज़े के जीवाणु नहीं पाए जाते. जबकि नेपाल में यह अकसर देखा जाता है.

रोकथाम

अमरीकी स्वास्थ्य संघ के अनुसार किसी भी देश में अगर पीने के पानी की व्यवस्था साफ हो और सफ़ाई का ध्यान रखा जाए तो हैज़े जैसी बीमारियों की रोकथाम संभव है.

हेती में आए भूकंप के बाद 13 लाख से ज़्यादा लोग शरणार्थी कैंपों में रह रहे हैं. पीने के पानी की ख़राब व्यवस्था और स्वच्छता की कमी के चलते ये लोग तेज़ी से हैज़े का शिकार हो रहे हैं.

स्वास्थय विशेषज्ञों का मानना है कि ये महामारी धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी लेकिन इसका जीवाणु मलेरिया और टीबी के जीवाणुओं से मिलकर हेती में हमेशा के लिए ख़तरा बन जाएगा.

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