लंदन में छात्रों का ज़ोरदार प्रदर्शन

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ब्रिटेन में इंग्लैंड की यूनिवर्सिटियों के शिक्षण शुल्क में तीन गुना तक की वृद्धि के सरकार के प्रस्ताव के ख़िलाफ़ हज़ारों छात्रों और शिक्षकों ने लंदन में ज़ोरदार प्रदर्शन किया है.

लंदन में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दोनों दलो--कंज़रवेटिव पार्टी और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी--के दफ़्तरों के बाहर उग्र प्रदर्शन हुए हैं, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव में नौ लोग घायल हो गए हैं.

शिक्षा विदों का कहना है कि फ़ीस बढ़ाने से छात्र क़र्ज़ के बोझ तले दब जाएंगे.

शिक्षा विदों का कहना है कि फ़ीस बढ़ाने से छात्र क़र्ज़ के बोझ तले दब जाएंगे.

कई प्रदर्शनकारी छात्र वेस्टमिंस्टर स्थित कंज़रवेटिव पार्टी के मुख्यालय में घुस गए जिन्हें पुलिस ने कुछ समय बाद वहाँ से हटा दिया.

नेशनल यूनियन ऑफ़ स्टूडेंट्स (एनयूएस) ने कुछ स्थानों पर हुई तोड़फोड़ की निंदा की है, यूनियन ने कहा है कि 30 हज़ार छात्रों का प्रदर्शन मूलतः शांतिपूर्ण रहा है और कुछ लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.

शुरुआत में छात्रों का प्रदर्शन काफ़ी शांतिपूर्ण था लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बाद में कुछ लोग अपने चेहरे पर कपड़ा बाँधकर, हाथ में क्रिकेट के बल्ले लेकर आए और तोड़फोड़ करने लगे जो शायद छात्र नहीं थे.

देश के कई हिस्सों से बसों में भरकर हज़ारों छात्र आए थे, इन बदलावों से सीधे प्रभावित नहीं हो रहे वेल्स से भी दो हज़ार छात्र प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के लिए लंदन पहुँचे थे.

छात्रों की धमकी

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे उन सांसदों के ख़िलाफ़ अभियान चलाएँगे जिन्होंने इस वर्ष मई में हुए चुनाव में शिक्षण शुल्क न बढ़ाने का वादा किया था लेकिन अब 'वादाख़िलाफ़ी' कर रहे हैं.

लगभग तीस हज़ार छात्रों ने मार्च में हिस्सा लिया

उनके निशाने पर मुख्य रूप से सत्ताधारी गठबंधन के छोटे पार्टनर लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद हैं जिन्होंने बाक़ायदा एक शपथपत्र पर हस्ताक्षर किए थे कि वे शिक्षण शुल्क बढ़ाने के ख़िलाफ़ हैं.

एनयूएस ने कहा है कि वे वादा तोड़ने वाले सांसदों को संसद की सदस्यता से हटाने का अभियान चलाएँगे.

वे लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और उप प्रधानमंत्री निक क्लेग से ख़ास तौर पर नाराज़ हैं जिन्होंने चुनाव से पहले ट्यूशन फ़ीस न बढ़ाने का वादा करने के बाद, अब उसे जायज़ ठहराया है.

छात्र संगठन का कहना है कि यूनिवर्सिटी वाले शहरों से आने वाले सांसदों के ख़िलाफ़ हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और उनके प्रति अविश्वास प्रकट किया जाएगा.

ब्रितानी संविधान के नियमों के मुताबिक किसी भी सांसद को वापस बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है, विडंबना ही है कि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में ऐसा प्रावधान करने की बात कही थी कि जनता का विश्वास खो चुके सांसदों को हटाया जा सके.

छात्र नेताओं का कहना है कि प्रावधानों में बदलाव का पहला निशाना लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों को ही बनाया जाएगा.

सरकारी ख़र्च में कटौती के अभियान के तहत उच्च शिक्षा के बजट में 40 प्रतिशत की कटौती की जा रही है, सरकार ने 2012 से नए शिक्षण शुल्क लागू करने की बात कही है, नई व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालय छात्रों से प्रति वर्ष नौ हज़ार पाउंड तक (लगभग साढ़े छह लाख रुपए) वसूल सकते हैं.

शिक्षण शुल्क का मामला एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है. संसद में विपक्षी लेबर पार्टी ने सत्ताधारी गठबंधन को इस मामले पर लगातार मुश्किल में डाल रखा है.

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