रवांडा में एड्स की रोकथाम के लिए ख़तना

रवांडा के सैनिक
Image caption शुरूआत में ये अभियान सेना और पुलिस के जवानों पर केंद्रित रहेगा.

अफ़्रीकी देश रवांडा में स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वे अगले दो सालों में देश में क़रीब बीस लाख लोगों का ख़तना करने की योजना बना रहे हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक ये पहल देश में एड्स के ख़तरे से निबटने के लिए की जा रही है.

रवांडा ने स्वास्थ्य के मामले में संयुक्त राष्ट्र सहस्त्राब्दि विकास के प्रस्तावित लक्ष्यों की प्राप्ति की ओर पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति की है.

उसकी सफलता की एक प्रमुख कहानी है कि एड्स के वायरस से प्रभावित लोगों की संख्या को 11 प्रतिशत से कम करके क़रीब तीन प्रतिशत तक लाना.

अब रवांडा के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसी दिशा में और आगे क़दम बढ़ाते हुए फ़ैसला किया है कि वे एक अभियान चलाएंगे जिसक तहत अगले दो सालों में क़रीब बीस लाख पुरुषों का ख़तना किया जाएगा.

एड्स से बचाव

ये क़दम साल 2008 में आई उन रिपोर्टों के आधार पर उठाया जा रहा है जिनमें कहा गया था कि ख़तना किए गए लोग सामान्य लोगों की तुलना में सहवास के दौरान 60 प्रतिशत ज़्यादा सुरक्षित रहते हैं.

रवांडा में एड्स आयोग की अध्यक्ष डा. अनिता असिम्वे ने बीबीसी को बताया कि देश में 2012 तक बीस लाख लोगों का ख़तना करने के लिए पर्याप्त फंड की व्यवस्था की जा चुकी है.

डॉक्टर अनिता असिम्वे ने बीबीसी को बताया, "शोधों के आधार पर ये बात साबित हो चुकी है कि पुरुषों में ख़तना उनके एचआईवी वायरस से प्रभावित होने की आशंका को 60 प्रतिशत तक कम कर देता है. यही वो आधार है जिसने हमें एड्स से लड़ने के लिए इस दिशा में प्रेरित किया है. इसलिए हमारी योजना है कि हम अगले दो सालों में यानी साल 2012 के अंत तक बीस लाख पुरुषों का ख़तना करा सकें."

हालांकि अभी तक रवांडा में आमतौर पर पुरुषों के ख़तने की परंपरा नहीं है. इसलिए लोगों को इसके लिए प्रेरित करने के लिए व्यापक पैमाने पर प्रचार अभियान चलाना पड़ेगा.

स्वास्थ्य अधिकारियों को तो इस काम का प्रशिक्षण दिया जा चुका है.

योजना की शुरुआत में सबसे पहले सेना और पुलिस के जवानों और विश्वविद्यालय के छात्रों को ख़तने का लक्ष्य रखा गया है और इनके लिए ये लगभग अनिवार्य होगा. स्वास्थ्य विभाग देश के सभी नवजात शिशुओं को ख़तने के लिए प्रचार अभियान चला रहा है.

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