उत्तर कोरिया पर परमाणु प्रसार का संदेह

उत्तर कोरिया का एक परमाणु संयंत्र
Image caption उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम की वजह से उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने अपनी एक ताज़ा रिपोर्ट में संदेह व्यक्त किया है कि उत्तर कोरिया परमाणु तकनीक के प्रसार में संलग्न रहा है.

विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि हो सकता है कि उत्तर कोरिया ने ईरान, सीरिया और बर्मा को परमाणु तकनीक मुहैया करवाई हो.

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की रिपोर्ट एक संवेदनशील राजनीतिक मसला है और उत्तर कोरिया का सहयोगी चीन इस रिपोर्ट को प्रकाशित होने से रोकता रहा है.

एक पुराना दस्तावेज़ छह महीने के इंतज़ार के बाद सार्वजनिक हो सका है और इसी में परमाणु तकनीक के प्रसार की आशंका जताई गई है.

छमाही रिपोर्ट

अब विशेषज्ञों ने उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंध पर अपनी छमाही रिपोर्ट पेश कर दी है. हालांकि इसके प्रकाशन में अभी कुछ वक़्त लगेगा.

लेकिन पुराने दस्तावेज़ बताते हैं कि विशेषज्ञों को यह आशंका है कि उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियार बनाने की प्रतिबंधित तकनीक कई देशों को मुहैया करवाई है.

विशेषज्ञों के इस दल ने कहा है कि सबूत इशारा करते हैं कि उत्तर कोरिया ने ईरान, सीरिया और बर्मा को बैलेस्टिक मिसाइल दिए और उन्हें परमाणु तकनीक दी.

इस दल ने यह आकलन कई देशों की सरकारी रिपोर्ट, संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों और मीडिया की रिपोर्टों के आधार पर किया है.

हालांकि यह सूचना संयु्क्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को छह महीने पहले दे दी गई थी लेकिन यह इसी हफ़्ते सार्वजनिक की गई है.

Image caption सुरक्षा परिषद में पेश की गई रिपोर्ट को चीन ने छह महीने तक रोके रखा

दरअसल चीन ने इन दस्तावेज़ों के प्रकाशन को रोक रखा था.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेषज्ञ एक उत्तर कोरियाई कंपनी की बर्मा में चल रही गतिविधियों और जापान में तीन व्यक्तियों की गिरफ़्तारी के मामले की भी जाँच कर रही है.

इस कंपनी के तार प्योंगयोंग से जुड़े हुए हैं और यह कथित तौर पर वह तकनीक बर्मा को देने की कोशिश कर रही थी जिससे कि परमाणु हथियार का एक अहम हिस्सा तैयार किया जा सकता है.

विशेषज्ञों के इस दल का काम प्रतिबंधों को लागू करवाने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सहायता करना होता है.

लेकिन यह पहली बार नहीं है जब चीन अपने किसी मित्र देश की इस तरह से मदद करने का प्रयास कर रहा हो. इससे पहले चीन सूडान जैसे देश का भी बचाव करता रहा है.

इस समय चीन दारफ़ुर में हथियारों पर एक रिपोर्ट को रोकने के प्रयास में है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उस इलाक़े में चीन में बनी हुई बंदूक की गोलियाँ मिली हैं, हालांकि रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि इसका संबंध सीधे तौर पर चीन की सरकार से है.

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