'अल क़ायदा को नहीं हराया जा सकता है'

जनरल रिचर्डस
Image caption जनरल रिचर्डस का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के नागरिक नैटो सेना से ऊबने लगे हैं

ब्रितानी सेना के प्रमुख जनरल डेविड रिचर्ड्स का कहना है कि अल क़ायदा को नहीं हराया जा सकता है.

अफ़ग़ानिस्तान में नैटो सेना के प्रमुख रह चुके जनरल रिचर्ड्स का कहना है कि ब्रिटेन को अगले 30 साल तक इस्लामी चरमपंथ से निबटने के लिए तैयार रहना चाहिए.

ब्रिटिश अख़बार संडे टेलीग्राफ़ को दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि इस सच्चाई के मद्देनज़र ब्रिटेन को इस्लामी चरमपंथ पर जीत का ख़्याल छोड़कर अपने नागरिकों की सुरक्षा की तरफ़ ध्यान देना चाहिए.

उनका कहना है कि नागरिकों को सुरक्षा मुहैया करवाने के काम में ज़रूर सफ़लता पाई जा सकती है.

नई सोच

बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर का कहना है कि जनरल रिचर्ड्स की टिप्पणी 'नए यथार्थवाद' को दर्शाती है.

उनका कहना था कि ऐसे बयान ब्रिटेन और अमरीका में चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई की योजना बना रहे लोगों के बीच एक नई सोच का उदाहरण हैं.

फ़्रैंक गार्डनर मानते हैं कि पाँच साल पहले अगर कोई व्यक्ति इस क़िस्म के बयान देता तो उसे पराजयवादी क़रार दे दिया जाता.

पूर्व सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचोव ने हाल में ही कहा है कि अफ़गानिस्तान में नैटो गठबंधन की जीत संभव नहीं है.

संडे टेलीग्राफ़ के इंटरव्यू में जनरल रिचर्ड्स ने कहा है कि एक पारंपरिक युद्ध में किसी देश की राजधानी या बड़े शहर में फ़ौज के घुसने को जीत क़रार दिया जा सकता है. लेकिन यहाँ ये सवाल पूछे जाने की ज़रूरत है कि क्या इस्लामी चरमपंथ के ख़िलाफ़ पूरी जीत पाने की वाक़ई ज़रूरत है?

उनका कहना था, "मेरा ख़्याल है इसकी कोई ज़रुरत नहीं है और न ही ये संभव है."

उनका कहना था कि इस लड़ाई में 'रोकथाम' ही ज्यादा कारगर हो सकती है और लंबे समय में इस पर शिक्षा और प्रजातंत्र को बढ़ावा देकर क़ाबू पाया जा सकता है. उन्होंने इस्लामी चरमपंथ की तुलना नाज़ीवाद से की है.

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