बर्मा की जनता की बात सुनूंगी: सू ची

आंग सान सू ची

बर्मा की विपक्षी नेता आंग सान सू ची ने कहा है कि अगला क़दम उठाने से पहले वो ये जानना चाहेंगी कि बर्मा की जनता क्या चाहती है.

शनिवार को अपनी रिहाई के बाद उन्होंने सबसे पहला इंटरव्यू बीबीसी को दिया.

उन्होंने कहा, “मुझे सबसे पहला काम ये करना है कि बर्मा के लोगों की बात सुननी है. मैं दूसरे देशों की बात भी सुनना चाहती हूं कि वो हमारे लिए क्या कर सकते हैं. उसके बाद ऐसा रास्ता निकालना है जो अधिकतर लोगों को स्वीकार्य हो.”

नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी की नेता सू ची ने कहा कि उनकी पार्टी हाल में हुए चुनाव में धांधली के आरोपों की जांच कर रही है.

उनका कहना था, “जैसा मैंने सुना है कि इस चुनाव की निष्पक्षता के बारे में बहुत से सवाल उठाए जा रहे हैं और मतदान में धांधली के भी कई आरोप हैं. एनएलडी की एक समिति का गठन किया गया है जो इन आरोपों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करेगी."

ये पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी का चुनाव में हिस्सा न लेने का निर्णय सही था, उन्होंने कहा कि उनके विचार में ये फ़ैसला सही था.

आंग सान ने चुटकी लेते हुए कहा, ''ज़रा सोचिए अगर हम चुनाव लड़ते तो जो लोग मतों की धांधली में लगे हुए हैं, उनकी व्यस्तता कितनी बढ़ जाती.''

डरती नहीं

सू ची ने ये भी स्वीकार किया कि उन्हें फिर गिरफ़्तार किया जा सकता है लेकिन वो उससे नहीं डरतीं.

उनका कहना था, “मैं ये नहीं सोचती कि मैं ऐसा नहीं करूंगी या वैसा नहीं करूंगी क्योंकि वो फिर मुझे नज़रबंद कर देंगे. लेकिन मैं जानती हूं कि ऐसी संभावना हमेशा रहेगी कि मुझे फिर से गिरफ़्तार कर लिया जाए.”

बीबीसी से उन्होंने कहा, “मैं ऐसा चाहूंगी तो नहीं क्योंकि नज़रबंदी में आप अपना काम उस तरह नहीं कर पाते जैसा करना चाहिए.”

जब उनसे कहा गया कि उन्होने रिहाई के बाद से बर्मा की सैनिक सरकार की बहुत कम आलोचना की है तो उन्होंने कहा कि वो केवल आलोचना के नाम पर आलोचना नहीं करतीं.

उन्होंने कहा, “अगर आलोचना करने की ज़रूरत है तो मैं आलोचना करती हूं. बर्मा के जनरलों के बारे में जो कुछ कहने की ज़रूरत थी मैं कह चुकी हूं."

लंबी नज़रबंदी से आज़ाद हुई सू ची ने कहा, "ऐसा समय आ सकता है जब मुझे उन आलोचनाओं को दोहराना पड़े लेकिन मैं आशा करती हूं कि ऐसा मौक़ा कम ही आएगा.”

सू ची ने का, “मैं ये भी कहना चाहूंगी कि मैंने कभी किसी जनरल की व्यक्तिगत आलोचना नहीं की है.”

तो क्या इतने साल नज़रबंदी में रहना आलोचना के लिए काफ़ी नहीं था, इस सवाल के जवाब में आंग सान सू ची ने कहा, “मैं ऐसा नहीं समझती क्योंकि नज़रबंदी के बावजूद मेरी स्थिति उन लोगों से कहीं बेहतर थी जो जेलों में बंद हैं.”

उन्होंने कहा, “मैं अपनी नज़रबंदी के लिए इसलिए संघर्ष करती रही क्योंकि मैं क़ानूनी प्रक्रिया में विश्वास करती हूं और मैं समझती हूं कि उन्हें मुझे नज़रबंद करने का कोई क़ानूनी अधिकार था.''

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