'सीनेट स्टार्ट-2 संधि का अनुमोदन करे'

हिलेरी क्लिंटन
Image caption हिलेरी क्लिंटन ने निजी तौर पर सीनेट में जाकर सांसदों से अपील की है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने सीनेट से सीधे तौर पर अपील करते हुए कहा है कि वो रुस के साथ परमाणु हथियारों को कम करने की संधि को जनवरी महीने में नए कांग्रेस के आने से पहले अनुमोदित करे.

हिलेरी का कहना है कि अमरीका इस मुद्दे को और टाल नहीं सकता जबकि एक रिपब्लिकन सांसद जॉन काइल ए की ने मांग की थी कि इस संधि पर मतदान अगले वर्ष तक रोक दिया जाए.

इस संधि के तहत दोनों देशों को अपने परमाणु शस्त्रों को कम करना है. दोनों देशों के बीच इस संबंध में हुई एक अन्य संधि पिछले वर्ष दिसंबर में समाप्त हो गई थी.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रुस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव से कहा है कि यह संधि उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

हिलेरी ये अपील करने के लिए स्वयं सीनेट में गईं और उन्होंने कहा कि अगर स्टार्ट -2 ( एसटीएआरटी-2) संधि को इस साल अनुमोदित नहीं किया गया तो इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो जाएगा.

विदेश मंत्री ने सीनेट में सांसदों के साथ नब्बे मिनट बिताए और बातचीत की.

उनका कहना था कि इस संधि पर मतदान जल्द से जल्द हो जाना चाहिए और इसे और टालना सही नहीं होगा.

अगर इस संधि पर मतदान अगले साल तक रुका तो नई कांग्रेस इस पर फिर से पूरी तरह विचार करेगी.

संधि के बारे में अपील करने जब हिलेरी सीनेट में पहुंची तो उनके साथ डेमोक्रेट सांसद जॉन केरी और रिपब्लिकन सांसद रिचर्ड लुगर थे.

इस संधि को कई पूर्व विदेश मंत्रियों, पूर्व रक्षा मंत्रियों और पूर्व सैन्य कमांडरों ने समर्थन दिया है.

कुछ रिपब्लिकन सांसद इस संधि का यह कहते हुए विरोध करते रहे हैं कि इससे अमरीका की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाएगी.

इस संधि के तहत अमरीकी और रुसी नाभिकीय शस्त्रों में कमी आएगी और हथियारों की मौके पर ही निरीक्षण को बढ़ावा मिलेगा.

असल में इस संधि पर अमरीका की घरेलू राजनीति का असर साफ दिख रहा है. मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को कई सीटें मिले हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने बार बार कहा कि अमरीकी मतदाता चाहते हैं कि डेमोक्रेट और रिपब्लिकन मिल कर काम करें.

ओबामा प्रशासन स्टार्ट 2 संधि को विदेश नीति और रुस के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में अपनी बड़ी उपलब्धि बताता रहा है. अगर इस पर मतदान नहीं हुआ तो यह सरकार के बड़ी शर्मिंदगी का विषय हो सकता है.

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