नेटो का सहयोगी बना रुस

Image caption ओबामा ने भी रुस और नेटो के बीच सहयोग और संबंधों के पुनर्जीवित होने पर खुशी ज़ाहिर की.

नेटो के सदस्य देशों की सुरक्षा के लिए विकसित की जाने वाली मिसाइल सुरक्षा प्रणाली में भागीदारी के लिए रुस ने अपनी सहमती दे दी है.

नेटो के महासचिव एंडर्स फोग्ह रैसमसन ने लिस्बन में चल रहे नेटो सम्मेलन में बताया कि रुस ने कहा है कि वो प्राक्षेपिक मिसाइल के हमलों से बचाव के लिए तैयार की रही सुरक्षा प्रणाली में भागादारी के लिए तैयार है.

रैसमसन ने बताया कि रुस और नेटो ने लिखित तौर पर इस पर सहमति जताई है कि वो अब किसी भी रुप में एक दूसरे के लिए ख़तरा नहीं है.

उन्होंने कहा, '' ये पहली बार होगा कि दोनों पक्ष मिलकर ख़तरों से निपटने के लिए सहयोग करेंगे. ''

नेटो के इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का उद्देश्य था विश्व के सामने उपजी नई चुनौतियों पर रणनीति तैयार करना.

'राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण'

दो साल पहले रुस और जियोर्जिया के बीच हुए युद्ध के बाद रुस पहली बार नेटो सम्मेलन में शामिल हुआ है.

इससे पहले नेटो के सदस्य देश अपने इलाकों की रक्षा के लिए एक मिसाइल सुरक्षा प्रणाली विकसित करने पर रज़ामंद हुए थे.

नेटो प्रमुख ने कहा कि इस दिशा में रुस की यह सहमति 'राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण' है.

उन्होंने कहा कि सभी पक्ष इस बारे में सूचनाओं का आदान-प्रदान करेंगे और मुमकिन है कि हमला करने वाली मिसाइलों को मार गिराने की रणनीति पर भी काम करें.

अविश्वास की भावना

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी रुस और नेटो के बीच सहयोग और संबंधों के पुनर्जीवित होने पर खुशी ज़ाहिर की.

उन्होंने कहा, '' हम रुस को एक विरोधी के रुप में नहीं बल्कि एक सहयोगी के रुप में देखते हैं. हमने 21वीं सदी की चुनौतियों का मिलकर सामना करने पर सहमति जताई है और अफ़ग़ानिस्तान में नशीले पदार्थों के उत्पाद को रोकने पर भी बातचीत की है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि हमनें अब अपने बीच के तनाव को सहभागिता में बदल डाला है. ''

सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति दमित्रि मेदवेदेव से बातचीत के बाद रैसमसन ने कहा कि रुस ने एक करार के तहत नेटो का सामान अफ़ग़ानिस्तान तक पहुंचाने के लिए अपने क्षेत्रों के इस्तेमाल की इजाज़त भी दे दी है.

हालांकि जानकारों का मानना है कि रुस के राष्ट्रपति दमित्रि मेदवेदेव ने भले ही नेटो के सुर से सुर मिलाया हो, लेकिन रुस की संसद और सेना के कई वर्गों में नेटो के प्रति अविश्वास की भावना कायम है.

अफ़ग़ानिस्तान पर सहमति

नेटो शिखर सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन अफ़ग़ानिस्तान से नेटो सेना की वापसी के बारे में भी सहमति हो गई है.

नेटो के 28 देशों के नेताओं ने वर्ष 2014 के अंत तक अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा की कमान अफ़ग़ान सैनिकों के हाथों में सौंपे जाने की योजना को स्वीकृति दे दी है.

नेटो नेताओं के बीच हुई चर्चा के बाद रैसमसन और अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने अफ़ग़ानिस्तान में एक नई रणनीति पर हस्ताक्षर किए.

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