क्या है उत्तर कोरिया की मंशा

कोरिया

दोनों देशों की बीच हो रही ये कार्रवाई पिछले 50 सालों में अब तक की सबसे गंभीर मानी जा रही है.

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध बेहद नाज़ुक भी हैं और विस्फोटक भी. दोनों देशों के सीमा तटों पर लंबे समय से तनाव का माहौल है.

इस साल मार्च के महीने में दक्षिण कोरिया के एक जहाज़ पर विस्फोट हुआ और वह डूब गया. इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई जांच में स्पष्ट तौर पर ये सामने आया कि इसके लिए उत्तर कोरिया ज़िम्मेदार था.

दक्षिण कोरिया के इस छोटे से द्वीप पर तोपों से दागे गए गोले भी इस घटनाक्रम की ही एक कड़ी हैं.

दबाव की रणनीति

उत्तर कोरिया के नज़रिए से देखें तो यह कदम उसके हितों की सुरक्षा और दक्षिणी कोरिया पर दबाव बनाने के लिए किया गया है.

अपने इस क़दम के ज़रिए उत्तर कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दो महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं. पहला, विश्व मंच पर उत्तर कोरिया की ताकत का एहसास और दूसरा, उत्तर कोरिया में बदलते राजनीतिक नेतृत्व के संकेत.

उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में इस वक्त क्या चल रहा है इसके बारे में सीधे तौर पर कुछ भी कहना मुश्किल है. वहां आंतरिक स्तर पर क्या कुछ होता है इसके बारे में बाहर बैठे कुछ नहीं कहा जा सकता.

फिर भी ये जग ज़ाहिर है कि उत्तर कोरिया के शासक किंम जोंग इल ने अपने बेटे किंम जोंग उन को अपना उत्तराधिकारी बनाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं.

नेतृत्व में बदलाव

ये फ़ैसला अनिश्चितता और कयासों के एक लंबे दौर की शुरुआत करता है. यही वजह है कि उत्तर कोरिया की राजनीति पर पकड़ रखने वाले इन हमलों को लेकर पहले से ही आशंकित थे.

अपनी सैन्य ताकत को दिखाने और दबाव बनाने की रणनीति के तहत उत्तर कोरिया ने योंग्ब्योन में व्यापक स्तर पर यूरेनियम संवर्धन का जानकारी भी दी थी.

बड़े फ़लक पर देखें तो यह प्योंगयांग की कूटनीती का ही एक हिस्सा है. उत्तर कोरिया विश्व समुदाय और खासतौर पर अमरीका का ध्यान खींचना चाहता है.

कुछ लोगों का मानना है कि प्योंगयांग परमाणु मुद्दे पर फिर बातचीत की शुरुआत करना चाहता है लेकिन बदले में उसे एक कीमत भी चाहिए.

दिक्कत ये है कि प्योंगयांग जो करता है उससे उसकी योजनाओं और मंशा के बारे में कुछ भी अंदाज़ा लगाना कभी आसान नहीं रहा.

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