परमाणु ईंधन: अमरीका-पाक में टकराव

वेबसाइट विकीलीक्स पर जारी किए गए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि अमरीका और पाकिस्तान के बीच परमाणु ईंधन के मुद्दे पर ख़तरनाक टकराव बना हुआ है.

पाकिस्तानी परीक्षण संयंत्र से संवर्धित यूरेनियम हासिल करने के लिए अमरीका 2007 से ही एक अतिगोपनीय मिशन पर लगा हुआ है, और उसे अब तक सफलता नहीं मिली है.

अमरीकी अधिकारियों को डर है कि इस संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल अवैध हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है.

दस्तावेज़ों के अनुसार पाकिस्तान में अमरीका के राजदूत एनी डब्ल्यू पैटरसन ने मई 2009 में अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पाकिस्तान अमरीका के परमाणु तकनीक विशेषज्ञों को परमाणु संयंत्र में जाने का वक्त तय करने से इनकार कर रहा है.

तकनीक विशेषज्ञों को प्रमाणु शोध संयंत्र में जाने की अनुमति देने से इनकार करते वक्त पाकिस्तानी अधिकारियों ने मीडिया के दबाव का हवाला दिया.

इस पत्र में पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से कहा है, "परमाणु ईंधन को संयंत्र से हटाने का पता अगर स्थानीय मीडिया को लग गया तो मीडिया इसे अमरीका द्वारा पाकिस्तान से परमाणु हथियार छीन लेने के तौर पर प्रस्तुत करेगा."

पाक को लेकर संशय

Image caption वैसे अमरीका 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में' पाकिस्तान को अहम सहयोगी मानता है

जारी किए गए दस्तावेज़ो में एक जगह सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला ने कहा है कि पाकिस्तान की प्रगति में राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी सबसे बड़ा रोड़ा हैं.

शाह अब्दुल्ला ने आसिफ अली ज़रदारी के बारे में कहा है, "जब नेतृत्व ही ख़राब हो तो व्यवस्था पर उसका असर ज़रुर होता है."

जुलाई 2009 में धाबी के युवराज और उप सेना प्रमुख महोम्मद बिन ज़ायद ने आसिफ अली ज़रदारी के बारे कहा है कि ज़रदारी 'भ्रष्ट है खतरनाक नहीं'.

इन खुलासों में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का भी जिक्र हुआ है. पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का जिक्र करते हुए महोम्मद बिन ज़ायद ने कहा कि वो 'भ्रष्ट नहीं खतरनाक हैं'. साथ ही उन्होने कहा कि नवाज़ शरीफ़ पर के वादे पर भरोसा नहीं किया जा सकता .

वेबसाइट विकीलीक्स द्वारा सार्वजनिक किए गए गोपनीय संदेशों से स्पष्ट होता है कि 9/11 के हमलों के बाद से दुनिया के अन्य देशों के साथ अमरीका के संबंधों पर चरमपंथ के काले साए का बडा प्रभाव है.

दस्तावेज़ो से ये भी स्पष्ट है कि ओबामा प्रशासन अभी भी ये निर्धारित करने के लिए संघर्ष कर रहा है कि अल क़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ाई में किन पाकिस्तानियों पर भरोसा करे और किन पाकिस्तानियों पर नहीं.

वेबसाइट विकीलीक्स पर विश्व भर के अमरीकी दूतावासों की ओर से भेजे गए क़रीब ढाई लाख गोपनीय संदेशों को सार्वजनिक किया है जिसमें ये सब जानकारियाँ दी गई हैं.

संबंधित समाचार