समलैंगिकों की भर्ती से प्रतिबंध हटे: अमरीकी रक्षा विभाग

Image caption कई देश समलैंगिकों को सेना में भर्ती की अनुमति देते हैं

अमरीकी रक्षा विभाग की एक रिपोर्ट में ये निष्कर्ष निकाला गया है कि सेना की व्यवस्था को क्षति पहुँचाए बिना समलैंगिकों की सेना में भर्ती पर से प्रतिबंध हटाया जा सकता है.

अमरीका के रक्षा मंत्री रोबर्ट गेट्स ने कहा कि इस संबंध में एक सर्वेक्षण किया गया जिसमें अधिकतर सैनिकों ने इस बात का समर्थन किया.

गेट्स ने अमरीकी संसद से इस नीति को समाप्त करने का अनुरोध किया और कहा कि इस परिवर्तन को लेकर जो आशंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं, वो सच नहीं हैं.

साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रतिबंध के ख़तरों से बचने की तैयारी और सावधानी बरतने की ज़रूरत है.

ग़ौरतलब है कि अमरीका की अदालत ने अपने एक फ़ैसले में कहा था कि सरकार की 'पूछो नहीं-बताओ नहीं' की नीति असंवैधानिक है.

'पूछो नहीं-बताओ नहीं' के तहत किसी सैनिक से ये नहीं पूछा जाता कि यौन संबंधों को लेकर उसकी प्राथमिकता क्या है और न ही उसे स्वंय इसकी जानकारी देनी होती है.

'पूछो नहीं, बताओ नहीं'

इसका मतलब ये है कि समलैंगिक लोग सेना में काम कर सकते हैं लेकिन अगर ये बात सार्वजनिक होती है तो उस सैनिक को बर्खास्त किया जा सकता है इसलिए समलैंगिक सैनिकों को ये जानकारी गुप्त रखनी होती है.

'पूछो नहीं-बताओ नहीं' की नीति को 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने लागू किया था.

राष्ट्रपति बराक ओबामा और कुछ सैन्य अधिकारी चाहते हैं कि इस क़ानून को बदल दिया जाए.

राष्ट्रपति ओबामा कह चुके हैं कि वे सेना में समलैंगिकों के भर्ती के पक्ष में हैं. उनकी सरकार ने अमरीका के निचले सदन में एक विधेयक पारित किया था लेकिन सीनेट में यह पारित नहीं हो सका.

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन, इसराइल और कई अन्य देश समलैंगिकों को सेना में भर्ती की अनुमति देते हैं.

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