ऐसे क़ैदी बाँट रहा था अमरीका

जर्मनी और कुवैत ने बंदियों को लेने से मना कर दिया था

ख़ुफ़िय़ा जानकारी लीक करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स से पता चला है कि किस तरह ओबामा प्रशासन ने ग्वांतानामो बे बंदी शिविर के क़ैदियों को दूसरे देशों को सौंपने की कोशिश की.

विकीलीक्स ने सोमवार को दूतावासों के ज़रिए होने वाले संवाद का विस्तृत विवरण प्रकाशित किया है, लगभग ढाई लाख दस्तावेज़ सामने आए हैं जिनसे दुनिया के अनेक देशों के साथ अमरीका के संबंधों के बारे में ऐसी बातें सामने आ रही हैं जिन्हें गोपनीय समझा जा रहा था.

इन्हीं में से एक दस्तावेज़ से पता चलता है कि जर्मनी ने ग्वांतानामो बे में बंद चीनी मूल के क़ैदियों को स्वीकार करने से मना कर दिया था क्योंकि चीन ने जर्मन सरकार को चेतावनी दी थी कि ऐसा करने से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ेगा.

फ्रांस ने दो क़ैदियों को लेना स्वीकार कर लिया था कि क्योंकि वह अमरीका के साथ बिगड़ रहे अपने संबंधों में सुधार की कोशिश कर रहा था.

लीक हुए दस्तावेज़ों से पता चला है कि प्रशांत महासागर के छोटे से द्वीप देश किरीबास को अमरीका ने चीनी मूल के बंदियों को स्वीकार करने के बदले में लाखों डॉलर देने की पेशकश की थी.

ऐसे ही एक दस्तावेज़ से पता चलता है कि स्लोवेनिया के प्रधानमंत्री बोरुत पाहोर ने एक बंदी को स्वीकार करने के बदले ओबामा से मुलाक़ात की शर्त रखी थी. स्लोवेनिया के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसे एक ग़लत निष्कर्ष बताया है.

कुवैत से कहा गया था कि वह कुवैती क़ैदियों को स्वीकार कर ले जिससे उसने यह कहते हुए मना कर दिया था कि उनके छोटे से देश में इन लोगों को रखने की जगह नहीं है.

यह तब की बात है जब बराक ओबामा विवादित ग्वांतानामो बे शिविर को बंद करने से पहले वहाँ बंद क़ैदियों को अलग-अलग देशों में भेजने की कोशिश कर रहे थे.

विकीलीक्स के ज़रिए जो ढाई लाख दस्तावेज़ सामने आए हैं उनको पढ़ने के बाद कई तरह के चौंकाने वाले निष्कर्ष सामने आ रहे हैं.

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