मलेशिया: बेंत से मारने की क्रूर सज़ा

कैदी
Image caption मलेशिया की जेलों में हर महीने छड़ी से मारने की 1200 से ज़्यादा घटनाएं होती हैं

अंतरराष्ट्रीय संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि मलेशिया में न्यायिक सज़ा के तौर पर कैदियों को बेंत से मारने का चलन बढ़ता जा रहा है और इस पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए.

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार मलेशिया में 60 से ज़्यादा अपराधों के लिए छड़ी या बेंत से पिटाई का प्रावधान है जो कई मामलों में क्रूरता की हदें पार कर जाता है.

एमनेस्टी का अनुमान है कि हर साल 10,000 से ज़्यादा कैदियों और 6000 शरणार्थियों को बेंत से मारने की सज़ा दी जाती है.

मलेशिया सरकार की दलील है कि बेंत की मार आपराधिक गतिविधियों को रोकने में ज़रूरी भूमिका निभाती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, ''मलेशिया के लगभग सभी इलाकों में सुरक्षा अधिकारी और सरकार के नुमाइंदे बेंत का इस्तेमाल कर कैदियों की खाल उधेड़ देते हैं. इस मार से उनके शरीर पर घाव हो जाते हैं और कैदियों की खाल छिल जाती है. इसके निशान हमेशा उनके शरीर पर रहते हैं.''

रिपोर्ट में एक शरणार्थी के हवाले से कहा गया है, '' एक कमरे में कैदियों को बेंत से मारने के लिए एक कुर्सी रखी हुई थी. हमें उस खास कुर्सी पर मुंह नीचे कर बैठने के लिए कहा जाता था. हमारे हाथ और पैर बंधे होते थे. फिर मुझे बेंत से मारा गया और एक कमरे में छोड़ दिया गया. मेरे ज़ख्मों पर मरहम लगाया गया, लेकिन कई दिनों कर उनसे खून निकलता रहा.''

मलेशिया की जेलों में हर महीने बेंत से मारने की 1200 से ज़्यादा घटनाएं होती हैं. नशीली दवाओं की तस्करी, हिंसक अपराधों और यौन दुर्व्यवहार के लिए आमतौर पर इस तरह की सज़ा दी जाती है.

रिपोर्ट के मुताबिक मलेशिया में बड़ी संख्या में लोग शरणार्थी के तौर पर प्रवेश कर लेते हैं. इन लोगों को सीमा पार खदेड़ने से पहले बेंत से मार खाने की सज़ा दी जाती है.

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