'अमरीकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण ठिकानों की सूची’

Image caption अमरीका के गृह मंत्रालय ने 2009 में अपने अधिकारियों को दुनियाभर के ऐसे ठिकानों की पहचान करने और उनकी सूची बनाने का निर्देश दिया था.

विकीलीक्स की ओर से जारी नए अमरीकी दस्तावेज़ों में दुनियाभर के कई ऐसे ठिकानों का ज़िक्र है जो अमरीका की नज़र में सबसे महत्वपूर्ण हैं और चरमपंथियों के निशाने पर हो सकते हैं.

ब्रिटेन के टाइम्स अख़बार के मुताबिक ये वो ठिकाने हैं जिनका नष्ट होना अमरीका के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा या राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में संकट पैदा कर सकता है.

विकीलीक्स के इन दस्तावेज़ों की जांच से ये बात सामने आई है कि अमरीका की सुरक्षा का दायरा काफी बड़ा है और इसमें विश्व के कई महत्वपूर्ण ठिकाने शामिल हैं.

ठिकानों की पहचान

दस्तावेज़ों के अनुसार इस सूची में संचार व्यवस्था के महत्वपूर्ण अड्डों के अलावा, कई गैस पाइपलाइनों, काँगों की एक ख़दान, ऑस्ट्रेलिया की एक ज़हर निरोधक फ़ैक्ट्री और डेनमार्क के एक इंसुलीन बनाने वाले प्लांट का ज़िक्र हैं.

अमरीका के गृह मंत्रालय ने 2009 में अपने अधिकारियों को दुनियाभर के ऐसे ठिकानों की पहचान करने और उनकी सूची बनाने का निर्देश दिया था.

बीबीसी के कूटनीतिक संवाददाता जोनाथन मार्कस के अनुसार अमरीकी दस्तावेज़ों से सामने आए ये कूटनीतिक संदेश अब तक की सबसे सनसनीखेज़ जानकारियां हो सकती हैं.

मार्कस का कहना है कि इन दस्तावेज़ों का भौगोलिक विस्तार बेहद चौंकाने वाला है.

चरमपंथियों से ख़तरा

अगर अमरीका आंतकवाद के खिलाफ विश्व स्तर पर युद्ध छेड़ने की बात करता है तो ये जानकारियां दुनियाभर के उन ठिकानों की एक सूची हैं जो अमरीका के लिए सुरक्षा के एजेंडे पर हो सकते हैं.

मार्कस के अनुसार इसमें कई ठिकानों का ज़िक्र हैरान करता हैं. जैसे पश्चिमी साइबेरिया में स्थित नॉडिम गैस-पाइपलाइन को विश्व की सबसे महत्वपूर्ण गैस-सेवा माना गया है.

मार्कस के अनुसार इस सूची में ब्रिटेन में मौजूद कई ठिकानों का भी ज़िक्र है. इनमें संचार के लिए इस्तेमाल में आने वाली कई महत्वपूर्ण सेटेलाइट्स, अमरीका के साथ साझेदारी में विकसित किए जा रहे हथियारों को बनाने वाले संयंत्र और परमाणु शक्ति से लैस पनडुब्बी बनाने वाली एडिनबर्ग की एक मैराइन इंजीनियरिंग कंपनी शामिल है.

अख़बार का कहना है कि अमरीका की नज़र में दुनियाभर के सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों की इन जानकारियों का इस्तेमाल चरमपंथी अपने फ़ायदे के लिए भी कर सकते हैं.

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