'चरमपंथियों को सऊदी अरब से मिलता है धन'

विकीलीक्स
Image caption अमरीका चरमपंथियों को मिल रही आर्थिक मदद से काफ़ी चिंतित रहा है.

विकीलीक्स के ज़रिए सामने आए गोपनीय अमरीकी दस्तावेज़ों से ये बात सामने आई है कि अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने पिछले साल आगाह किया था कि सऊदी अरब दुनिया भर में मौजूद सुन्नी चरमपंथियों को धन मुहैया कराने का प्रमुख स्रोत है.

हिलेरी के मुताबिक सऊदी अरब के अधिकारियों को ये समझाना एक बड़ी चुनौती थी कि इस मामले से निपटने के लिए रणनीतिक प्राथमिकता तय करने की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा कि जिन आतंकवादी संगठनों को मुख्य रूप से धन मुहैया कराया गया है उनमें अल- क़ायदा, तालिबान और लश्कर-ए-तैबा शामिल हैं.

विकीलीक्स ने जिन ख़ुफ़िया अमरीकी दस्तावेज़ों को प्रकाशित किया है उनमें संयुक्त अरब एमीरात, क़तर और कुवैत जैसे देशों के, चरमपंथियों से लड़ने के प्रयासों की आलोचना भी की गई है.

'प्रयास तेज़ हों'

Image caption अमरीकी राजनयिकों के अनुसार हज के दौरान चरमपंथी काफ़ी धन इकट्ठा करते हैं

दिसंबर 2009 के एक गोपनीय दस्तावेज़ के मुताबिक हिलेरी क्लिंटन ने अपने देश के राजनयिकों से अपील की थी कि चरमपंथियों को मिलने वाले धन पर रोक लगाने के लिए वे अपनी कोशिशों को दोगुना कर दें.

उनके मुताबिक इसी धन की वजह से पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान में अस्थिरता है और ये आतंकवादी गठबंधन सेना के सैनिकों को अपना निशाना बना रहे हैं.

हिलेरी का कहना था कि हालांकि सऊदी अरब ने इस 'फंडिंग' को रोकने की कोशिश की लेकिन चरमपंथियों को धन मुहैया कराने वालों का जाल बहुत व्यापक है.

हिलेरी के मुताबिक अल़-क़ायदा, तालिबान और लश्करे तैबा ने सऊदी अरब से आए पैसों से सालाना करोड़ों डॉलर बनाए हैं. ख़ासकर ये पैसे उन्हें हज यात्रा और रमज़ान के दौरान मिले थे.

एक अन्य ख़ुफ़िया अमरीकी संदेश में कहा गया है कि जमात- उद- दावा ने अपनी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के लिए साल 2005 में सऊदी अरब की एक प्रमुख कंपनी का इस्तेमाल.

कुछ अन्य दस्तावेजों के मुताबिक खाड़ी के तीन और देश चरमपंथियों को धन मुहैया कराते हैं.

यही नहीं अल-क़ायदा और दूसरे चरमपंथी समूहों ने कुवैत का दो तरह से शोषण किया है- एक धन के प्रमुख स्रोत के रूप में और दूसरा उसका इस्तेमाल रास्ते के रूप में.

दस्तावेज़ों के मुताबिक अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में बड़ी मात्रा में पैसा नगदी रूप में और 'इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर' के ज़रिए पहुंचा है.

ये धन ज़्यादातर वैध व्यापार और हवाला के ज़रिए पहुंचा है. दस्तावेज़ को मुताबिक नगद धन पर सीमा पर प्रभावी नियंत्रण न होने के कारण इसमें कोई संदेह नहीं कि इन पैसों का दुरुपयोग तालेबान और अफ़ग़ानिस्तान के ड्रग माफिया द्वारा हुआ हो.

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