सेना में समलैंगिकों को लेकर विवाद

मेजर माइक अलमी
Image caption रक्षा विभाग समलैंगिकों के सेना में प्रवेश पर प्रतिबंध को हटाना चाहता है.

अमरीकी रक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट ने सेना में समलैंगिकों के ख़िलाफ़ पाबंदी उठा लेने का प्रस्ताव रखा है. अमरीका के रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने भी अमरीकी संसद यानी कांग्रेस से इस क़ानून को हटाने की पुरजोर अपील की है.

लेकिन यह एक विवादास्पद मुद्दा है. कांग्रेस की प्रतिनिधि सभा ने इस क़ानून को हटाने की मंज़ूरी कुछ महीने पहले दे दी थी लेकिन सीनेट में विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी इसका कड़ा विरोध कर रही है.

इस क़ानून ने देश को और अमरीकी सेना को बांट कर रख दिया है. अमरीका में 1993 में भूतपूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने विरोध के बीच मध्यमार्ग अपनाते हुए इस क़ानून को मंज़ूरी दी थी.

इस क़ानून के अंतर्गत खुले तौर पर समलैंगिक पुरुषों और महिलाओं पर अमरीकी सेना में भर्ती होने पर प्रतिबंध लगाया गया था.

इसे 'डोंट आस्क डोंट टेल' पॉलिसी कहते हैं यानी अगर कोई समलैंगिक सेना में भर्ती होना चाहता है तो उसे यह ज़ाहिर करना ज़रूरी नहीं है. साथ ही सेना भी उनकी यौन प्राथमिकताओं के बारे में पूछताछ नहीं सकती.

लेकिन भर्ती होने के बाद समलैंगिक सैनिक खुद को समलैंगिक घोषित कर देते हैं तो उन्हें सेना से फ़ौरन निकाल दिया जाता है.

ऐसा ही माइक आलमी के साथ हुआ.

माइक आलमी

Image caption मेजर माइक अलमी के समलैंगिक होने का पता चलते ही उन्हें सेना से हटा दिया गया.

चार साल पहले मेजर माइक आलमी इराक़ में विभूषित अमरीकी सैनिक अफसरों में से एक थे. लेकिन उन्हें सेना से उस समय बर्ख़ास्त कर दिया गया जब उनके समलैंगिक होने का पता चला.

समलैंगिक होने को ज़ाहिर करना अमरीकी क़ानून का उल्लंघन है.

अब भी चार साल बाद माइक आलमी सेना में वापस लिए जाने के लिए लड़ रहे हैं, "इस क़ानून के अंतर्गत जिस तरह से हमारे साथ ख़राब सुलूक किया गया उस से हमारे साथी भयभीत हो गए थे. वो इस क़ानून को ख़त्म करने के पक्ष में हैं. वो हमारी लड़ाई में हमें समर्थन दे रहे हैं और चाहते हैं कि मैं एक अफ़सर की हेसियत से सेना में फिर से बहाल कर दिया जाऊं."

लेकिन उनकी सेना में वापसी तब ही संभव है जब इस क़ानून को अमरीकी सीनेट निरस्त करने की मंज़ूरी दे.

विपक्ष का विरोध

प्रतिनिधि सभा ने इसे पहले ही मंज़ूरी दे दी है. अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स इस क़ानून को हटाने का समर्थन करते हैं जबकि उनकी रिपब्लिकन पार्टी इसका कड़ा विरोध कर रही है.

पिछले सप्ताह उनके मंत्रालय की एक समिति ने इस पर सैनिकों और उनके परिवार वालों से बात करके एक रिपोर्ट पेश की जिसमें कहा गया की दो तिहाई फौजी समलैंगिकों को फ़ौज में भर्ती होने देने से नहीं रोकना चाहते हैं.

इस रिपोर्ट को पेश करने के बाद रक्षा मंत्री गेट्स ने वादा किया कि वे इस पर अमल करने के लिए तैयार हैं, "अगर इस क़ानून को ख़ारिज कर दिया गया तो मैं इस बात की पूरी कोशिश करूँगा की इसका युद्ध में लड़ रहे या लड़ने वाले सैनिकों की ताक़त,प्रभाव और क्षमता पर कोई नकारात्मक असर न हो."

लेकिन रिपब्लिकन पार्टी इस क़ानून को ख़त्म करने के पक्ष में फ़िलहाल नहीं है.

पार्टी के नेता जान मेकेन ने एक ब्यान में कहा है कि इस क़ानून को हटाने का ये सही समय नहीं है.

उनका कहना था, "अमरीकी सैनिक इस समय इराक़ और अफ़गानिस्तान में युद्ध लड़ रहे हैं उनके लिए यह सही नहीं होगा."

उनके विचार में जंग की समाप्ति के बाद इस क़ानून को हटाया जा सकता है.

एलिज़ाबेथ शर्ली

Image caption एलिज़ाबेथ शर्ली सेना में जाना चाहती हैं लेकिन तब तक नहीं जब तक समलैंगिकों के प्रवेश को वैध ना क़रार दे दिया जाए.

चौबीस वर्षीय एलिज़ाबेथ शर्ली समलैंगिक हैं और अमरीकी सेना में वकील की नौकरी चाहती हैं लेकिन उन्होंने क़सम खाई है कि जब तक समलैंगिकों के ख़िलाफ़ भेदभाव वाला यह क़ानून ख़त्म नहीं हो जाता तब तक वे सेना में भर्ती नहीं होंगी.

एलिज़ाबेथ शर्ली कहती हैं, "मैंने खुद से वादा किया है कि मैं इस क़ानून के अंतर्गत सेना में भर्ती नहीं होउंगी. मेरे इस फ़ैसले का कारण ये है कि सेना में भर्ती होने के लिए सेना की मर्यादा और इस के प्रति निष्ठा की शपथ लेना पड़ती है और इस क़ानून के तहत आप समलैंगिक होने को ज़ाहिर नहीं किया जा सकता. तो मुझे झूठ बोलना पड़ेगा. इस लिए इस क़ानून के अंतर्गत मैं अमरीकी सेना में भर्ती नहीं हो सकती."

राष्ट्रपति बराक ओबामा का इस क़ानून को हटाने का चुनावी वादा था.बिल क्लिंटन भी इस क़ानून के ख़िलाफ़ थे लेकिन उन्हें समझौता करना पड़ा था.

कुछ हफ़्तों में ये साफ़ हो जाएगा कि बराक ओबामा को भी समझौता करना पड़ सकता है या नहीं. अमरीका एक धार्मिक और पारंपरिक समाज है जहाँ इसाई धर्म के मानने वालों का बहुमत है और वो समलैंगिकों के अधिकारों को स्वीकार नहीं करते.

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