इसराइल को नहीं मना पाया अमरीका

नई इसराइली बस्तियाँ

इसराइली कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी इलाक़े में नई बसाहट का काम रोकने के लिए अमरीका इसराइल को मनाने में सफल नहीं हो सका है.

अब अमरीकी प्रशासन ने इसके लिए इसराइल को मनाने के प्रयास छोड़ दिए हैं.

यह मध्यपूर्व में शांति वार्ता को फिर से शुरु करवाने के प्रयासों का हिस्सा था क्योंकि फ़लस्तीनियों ने शर्त रखी है कि नई बसाहट के निर्माण कार्यों पर रोक लगाए बिना आगे बातचीत नहीं करेंगे.

अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस में पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि नई बसाहट पर रोक लगाने के लिए इसराइल को मनाने के अमरीकी प्रयास विफल हो गए हैं.

हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि अमरीका मध्यपूर्व में शांति वार्ता फिर से बहाल करने की प्रयास नहीं करेगा. उसने कहा है कि वह दोनों पक्षों को वार्ता के लिए साथ लाने के प्रयास जारी रखेगा.

अमरीका में फ़लस्तीनी प्रतिनिधि माएन राशिद एरिकात ने बीबीसी से कहा कि वे कब्ज़े वाली ज़मीन पर इसराइली बसाहट का विरोध जारी रखेंगे.

गत सितंबर में पश्चिमी तट पर इसराइली निर्माण कार्य पर लगी रोक के दस महीने की मियाद पूरी हो गई थी और इसराइल ने इस मियाद को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था.

इसके बाद फ़लस्तीनियों ने शांति वार्ता स्थगित कर दी थी.

नई व्यूह-रचना?

उधर इसराइल के रक्षा मंत्री एहुद बराक ने कहा है कि अमरीका के साथ वार्ता फ़िलहाल इसलिए टाल दी गई है क्योंकि अमरीका विकीलीक्स पर जारी दस्तावेज़ों और कोरिया प्रायद्वीप में उभरे तनाव के मुद्दों में उलझ गया है.

लेकिन अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता पीजे क्राउली ने इसका खंडन करते हुए कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है.

उन्होंने कहा, "रणनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है, हो सकता है कि व्यूह-रचना बदल गई हो."

विदेश विभाग के प्रवक्ता का कहना था, "हम कोशिश करते रहे हैं कि निर्माण कार्य पर लगी रोक जारी रह सके जिससे कि सार्थक और नियमित वार्ता का माहौल बन सके. लेकिन पर्याप्त प्रयास करने के बाद हम इस नतीजे पर पहुँचे कि इस रास्ते से हम वहाँ नहीं पहुँच सकते जिससे शांति के साझा लक्ष्य तक पहुँच सकें."

उनका कहना था, "हम इस विषय पर दोनों पक्षों से बातचीत जारी रखेंगे और वह तरीक़ा ढूँढ़ने का प्रयास करेंगे जिससे कि दोनों पक्षों में विश्वास बहाली हो और वे फिर बातचीत कर सके."

फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास के प्रवक्ता ने कहा है कि वे प्रतिक्रिया व्यक्त करने से पहले अमरीका के बयान का अध्ययन करना चाहेंगे.

वैसे इससे पहले फ़लस्तीनी कहते रहे हैं कि वे तब तक वार्ता शुरु नहीं करेंगे जब तक कि नई बसाहट का काम जारी है.

पिछले महीने ओबामा प्रशासन ने इसराइल को प्रस्ताव दिया था कि यदि वह नई बसाहट का काम रोकने की अपनी पुरानी रोक को 90 दिनों के लिए बढ़ाता है तो अमरीका उसे एक अच्छा ख़ासा पैकेज देगा जिसमें जेट फ़ाइटर्स और सुरक्षा की गारंटी शामिल है.

फिर मिलेंगे

Image caption नई बस्तियों के मामले ने ही वार्ता को बाधित किया है

बीबीसी संवाददाता किम घटास का कहना है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि अब अमरीका इस दिशा में किस तरह से आगे बढ़ना चाहता है.

इसराइली और फ़लस्तीनी वार्ताकार अगले हफ़्ते वॉशिंगटन में होंगे और शुक्रवार को विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन एक वक्तव्य देंगीं.

संवाददाता का कहना है कि यदि फ़लस्तीनी वार्ताकार वॉशिंगटन आने को राज़ी हो गए हैं इसका एक अर्थ यह है कि वे मान चुके हैं कि वार्ता से पहले बसाहट रोकने की उनकी मांग से काम नहीं चल रहा है.

उल्लेखनीय है कि इसराइल ने पश्चिमी तट, जिसमें पूर्वी यरुशलम शामिल है, पर वर्ष 1967 से कब्ज़ा कर रखा है. वह वहाँ सौ से अधिक बस्तियाँ तैयार कर रहा है जहाँ पाँच लाख यहूदियों को बसाया जाना है.

अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार यह अवैध है लेकिन इसराइल इसका खंडन करता है.

इस समय पश्चिमी तट के इलाक़े में कोई ढाई लाख इसराइली नागरिक रह रहे हैं.

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