टीबी की जांच के लिए डीएनए तकनीक

टीबी का बैक्टिरिया
Image caption विश्वव स्वास्थ्य संगठन ने टीबी की जांच के लिए पारंपरिक तकनीक से नई डीएनए तकनीक को बेहतर बताया.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टीबी का पता लगाने वाली नई डीएनए तकनीक का समर्थन किया है.

संगठन के अधिकारियों के मुताबिक इससे टीबी का जल्द पता लगाया जा सकेगा और यह टेस्ट ज़्यादा भरोसेमंद भी होगा.

डीएनए तकनीक के लिए न किसी विशेष प्रयोगशाला और न ही प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की ज़रुरत होगी.

इससे पहले 125 साल पुरानी पारंपरिक तकनीक का इस्तेमाल होता था.

इसके तहत टीबी की जांच करने और उसके परिणाम आने में तीन महीने का समय लग जाता था.इसमें थूक के नमूनों की जांच होती थी जो विशेष तरह की प्रयोगशाला में ही सभंव था.

लेकिन इस नई तकनीक के ज़रिए केवल तीन घटों में ही टीबी का पता चल जाएगा.

इसमें आधुनिक डीएनए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा जो कि पुरानी तकनीक से कहीं ज़्यादा तेज़ होती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इस नई तकनीक के ज़रिए ज़्यादा मरीज़ों की जल्द जांच हो पाएगी और इससे उनका इलाज भी तुरंत शुरु हो सकेगा.

जिन मरीज़ो पर दवाओं का कम असर होता है या जो लोग एचआईवी पाज़िटिव होते हैं उन पर भी टेस्ट कारगर होगा.

जब इन मरीज़ो पर पुरानी तकनीक के ज़रिए टेस्ट किया गया था तब उसके नतिजे नकारात्मक रहे थे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस तकनीक को उन देशों में ले जाने की सिफ़ारिश की है जहां टीबी के मामले बहुत ज़्यादा हैं उदाहरण के तौर पर अफ्रीका.

पिछले साल टीबी से 17 लाख लोगों की मौत हो गई थी.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का दावा है कि इस नई तकनीक से लाखों लोगों की जान बचाई जा सकेगी.

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