ईरान के विदेशमंत्री बरख़ास्त

मनुचेयर मुत्तकी
Image caption ईरान के राष्ट्रपति ने विदेशमंत्री मनुचेयर मुत्तकी को पद से हटा दिया है

ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनिजाद ने विदेशमंत्री मनुचेयर मुत्तकी को पद से हटा दिया है.

राष्ट्रपति ने अपने एक बयान में मुत्तकी की सेवाओं के लिए उनका धन्यवाद दिया लेकिन उनकी बरख़ास्तगी की कोई वजह नहीं बताई.

मुत्तकी पिछले पांच साल से ये पद संभाल रहे थे और वह इस समय अफ़्रीकी देश सेनेगल की यात्रा पर गए हुए हैं.

मनूचेयर मुत्तकी पश्चिम के साथ हो रही परमाणु वार्ताओं में एक प्रमुख भूमिका निभा रहे थे और इस बात के ज़रा भी संकेत नहीं थे कि उन्हे अपना पद छोड़ना पड़ेगा.

उनकी जगह ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख अली अकबर सलेही को विदेशमंत्री नियुक्त कर दिया गया है.

आंतरिक सत्ता संघर्ष

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुत्तकी की बरख़ास्तगी ईरान के रूढ़िवादियों और उदारवादियों के बीच चल रहे सत्ता संघर्ष का हिस्सा हो सकता है.

मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार राष्ट्रपति महमूद अहमदीनिजाद ने मुत्तकी को लिखे अपने पत्र में कहा, "मैं विदेशमंत्री के रूप में आपकी कर्मठता और सेवा की प्रशंसा करता हूं".

मुत्तकी संसद के अध्यक्ष अली लारीजानी के निकट समझे जाते हैं और विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति और संसद में खींच-तान चलती रहती है.

मुत्तकी को हटाए जाने से संसद में मौजूद राष्ट्रपति के रूढ़िवादी विरोधी और नाराज़ होंगे.

लेकिन लगता है कि इस मामले में राष्ट्रपति को ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह ख़मनेइ का समर्थन प्राप्त है.

संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध

देश के परमाणु कार्यक्रम को बंद करने के अंतरराष्ट्रीय दबाव को लेकर ईरान में मुत्तकी की आलोचना हुई थी.

जून के महीने में संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने चौथे दौर के प्रतिबंध लागू किए थे.

लेकिन हाल में जिनीवा में हुई वार्ताएं अगले महीने इस्तांबुल में और बातचीत के समझौते के साथ समाप्त हुई थीं.

ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम विशुद्ध रूप से ऊर्जा पैदा करने के लिए है जबकि पश्चिमी देशों को संदेह है कि वो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है.

विश्लेषकों का कहना है कि अब नव-नियुक्त विदेशमंत्री अली अकबर सलेही ईरान के परमाणु महत्वाकांक्षाओं को एक व्यापक मंच पर लेकर जाएंगे.

इस बीच जर्मनी के विदेशमंत्री गुइडो वेस्टरवेले ने ईरान से आग्रह किया है कि वो परमाणु कार्यक्रम पर पश्चिम के साथ वार्ताएं जारी रखे.

संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्यों के साथ-साथ जर्मनी भी जिनीवा में हुई वार्ताओं में शामिल था.

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