भारत दोस्ती और सहयोग बढ़ाने आया हूँ: वेन

चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ तीन दिनों की भारत यात्रा पर दिल्ली पहुँच गए हैं. उन्होंने बुधवार शाम को राजधानी में टैगोर इंटरनेशनल स्कूल का दौरा किया.

भारत पहुंचने के बाद एक बयान में उन्होंने कहा, "मैं भारत दोस्ती और सहयोग बढ़ाने आया हूँ जहाँ पहले की उपलब्धियों को और पुख़्ता किया जाएगा और नई चुनौतियों से निपटा जाएगा."

बाद में दिल्ली में व्यापारिक जगत के नेताओं को संबोधित करते हुए वेन जियाबाओ ने कहा कि विश्व में इतनी जगह है कि चीन और भारत दोनों आगे बढ़ सकें.

उनका कहना था, "मीडिया में ख़बरें आती हैं कि भारत और चीन प्रतिदंद्वी हैं. मैं इससे सहमत नहीं हूँ. विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएँ प्रतिदंद्वी नहीं बल्कि साझीदार हैं."

बृहस्पतिवार को वेन जियाबाओ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करेंगे जिसके बाद दोनों देशों के बीच कई व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.

माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच सुरक्षा और सामरिक मुद्दों पर चर्चा होगी.

मतभेद

जियाबाओ के साथ चीन से एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है. इनमें व्यापारी, वरिष्ठ मंत्री और शीर्ष अधिकारी शामिल हैं.

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार चीनी प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत होगी और कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.

पिछले एक दशक में चीन और भारत के बीच आपसी व्यापार में काफ़ी प्रगति हुई है.दोनों देशों के बीच व्यापार अब 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.लेकिन कई ऐसे राजनीतिक मुद्दे हैं जिन पर दोनों देशों के बीच मतभेद बना हुआ है.

विश्व में चीन के बढ़ते हुए आर्थिक और राजनीतिक दबदबे को ध्यान में रखते हुए भारत ने माध्यमिक स्तर पर अगले वर्ष से चीनी भाषा की पढ़ाई की व्यवस्था करने का फ़ैसला किया है.भारत का दौरा पूरा करने के बाद शुक्रवार को चीनी प्रधानमंत्री दो दिनों की यात्रा के लिए पाकिस्तान रवाना हो जाएंगे.

इस बीच चीनी प्रधानमंत्री के दौरे के विरोध में दिल्ली में तिब्बत के सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया.

वहीं चीन के प्रधानमंत्री ने दिल्ली में नौ भारतीयों को चाइना-इंडिया फ़्रेंडशिप अवॉर्ड दिए. इनमें सीताराम येचुरी, प्रोफ़ेसर चुंग, जी विश्वनाथन, जी बनर्जी, एन मोहंती और पल्लवी अय्यर शामिल हैं. कहा जा रहा है कि करण सिंह का नाम भी इस सूची में था लेकिन वे पुरस्कार लेने नहीं आए.

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