आप्रवासियों पर लगाई गई सीमा अवैध

ब्रिटेन
Image caption सरकार ने इस साल जुलाई में यह सीमा तय की थी

ब्रिटेन की एक अदालत ने इस साल जुलाई में सरकार की ओर से आप्रवासियों के आने पर लगाई गई सीमा को ग़ैरक़ानूनी ठहराया है.

अब ब्रितानी सरकार का कहना है कि वो अदालत के फ़ैसले को चुनौती दे सकती है.

इस साल जुलाई में ब्रितानी सरकार ने अस्थायी रूप से ये सीमा तय की थी कि कितने हुनरमंद लोग यूरोपीय संघ के अलावा अन्य देशों से हर साल ब्रिटेन आ सकते हैं.

सरकार ने यह तय किया था कि अप्रैल 2011 तक ऐसे सिर्फ़ 24100 लोग ही ब्रिटेन आ सकते हैं. इनमें वो लोग शामिल नहीं हैं, जिन्हें ब्रिटेन में नौकरी का प्रस्ताव मिला है.

असर

इस फ़ैसले से भारतीयों पर भी असर पड़ा था. लेकिन शुक्रवार को हाई कोर्ट ऑफ़ इंग्लैंड एंड वेल्स ने कहा कि अगले साल अप्रैल में सरकार संसद में ऐसी योजना पर विचार करने वाली है, जिसमें आप्रवासियों की संख्या स्थायी रूप से तय हो सकता है.

अदालत का कहना था कि इस स्थिति में संसद की समीक्षा के बिना यह सीमा ग़ैर क़ानूनी है. अदालत ने गृह मंत्री टेरेसा मे को आड़े हाथों भी लिया और कहा कि वे संसद से अलग इस मामले की समीक्षा की कोशिश कर रही हैं.

कोर्ट ने कहा कि इस स्थिति में कोई भी क़ानूनी सीमा अवैध है.

जानकारों का कहना है कि जनवरी में सरकार एक बार फिर आप्रवासियों की संख्या पर सीमा तय कर सकती है, लेकिन उसे इस प्रस्ताव को संसद में रखना होगा.

दूसरी ओर आप्रवासन मंत्री डेमियन ग्रीन ने कहा है कि अगर आधार मिला, तो सरकार इस फ़ैसले को चुनौती देगी.

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