'मगराही को व्यापारिक हितों के लिए छोड़ा'

मगराही
Image caption स्टॉकलैंड ने मगराही को स्वास्थ्य कारणों से 2009 में रिहा कर दिया था

अमरीकी सीनेट की एक समिति की रिपोर्ट ने ब्रिटेन पर लॉकरबी बम हमले के दोषी अल मगराही के सिलसिले में गंभीर आरोप लगाए हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टॉकलैंड सरकार ने लॉकरबी कांड के दोषी लीबिया के अब्दुल बासित अल मगराही को राजनीतिक और वाणिज्यिक फ़ायदों के कारण पिछले साल रिहा कर दिया था ना की उनके बिगड़ते स्वास्थय के कारण.

रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन को डर था कि अगर वो मगराही को रिहा नहीं करती तो लीबिया के साथ तेल संबंधी एक बड़ा सौदा नहीं हो पाएगा.

वर्ष 1988 में स्कॉटलैंड में लॉकरबी के ऊपर उड़ान भर रहे अमरीकी पैनएम विमान में धमाका हुआ था जिसमें सभी 270 लोग मारे गए थे. उनमें से अधिकतर अमरीकी नागरिक थे.

इस कांड में दोषी पाए गए 57 वर्षीय मगराही स्कॉटलैंड में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे थे. वे प्रॉस्ट्रेट कैंसर से पीड़ित थे. 2009 में स्कॉटलैंड ने कैंसर से पीड़ित मगराही को मानवीय आधार पर रिहा कर दिया था.

क्या है आरोप

स्कॉटलैंड ने मगराही को रिहा करते हुए कहा था वो तीन महीने से ज़्यादा अरसे तक ज़िंदा नहीं रहेंगे लेकिन 16 महीने बाद वो आज भी जीवित हैं और लीबिया में आरामदायक घर में रह रहे हैं.

अमरीकी सीनेट की रिपोर्ट में अल-मगराही को दोबारा जेल भेजने की मांग की गई है और ब्रिटेन और स्कॉटलैंड सरकारों से अमरीका से माफ़ी मांगने को कहा गया है.21 दिसंबर को स्कॉटलैंड के शहर लॉकरबी के ऊपर विमान में हुए बम धमाके को 22 साल हो गए. लेकिन यह मामला अब भी विवादों में घिरा है.

हमलों के दोषी अल-मगराही को रिहा किए जाने के बाद लीबिया में उनका हीरो की तरह स्वागत हुआ था.

उनकी रिहाई के बाद अमरीकी प्रशासन स्कॉटलैंड और ब्रिटेन से बहुत नाराज़ हुआ था और इस बात की छानबीन की मांग की गई थी.

अल-मगराही की रिहाई के कारणों का पता चलाने के लिए प्रशासन ने चार सीनेटरों की समिति बिठाई थी जिसने अब अपनी रिपोर्ट पेश की है.

समिति की रिपोर्ट पेश करते हुए रॉबर्ट मेनेंदेज़ ने कहा, "लॉकरबी हमलावर को स्वास्थ्य कारणों से रिहा नहीं किया गया. अल-मगराही को लीबिया और निजी कंपनियों के सियासी और व्यापारिक दबाव में आकर रिहा किया गया. ब्रिटेन की सरकार लीबिया द्वारा व्यापारिक युद्ध की धमकियों के कारण दवाब में आ गई और स्कॉटलैंड ब्रिटिश पेट्रोलियम के दबाव में आ गया. स्कॉटलैंड की सरकार ने लीबिया से संपर्क किया और ब्रिटेन की सरकार ने अल-मगराही को रिहा करने के मामले में लीबिया से बात की.”

'सौदे के बदले रिहाई'

हाल ही में विकीलीक्स के ज़रिए सामने आए गोपनीय अमरीकी दस्तावेज़ों में भी कहा गया है कि लीबिया ने लॉकरबी कांड के लिए ज़िम्मेदार अल-मगराही को जेल छुड़ाने के लिए किस तरह से दबाव बनाया था.

कुछ महीने पहले जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन अमरीका आए थे तो उन पर इस मामले की न्यायिक जांच करने का काफ़ी दबाव था.

लेकिन उन्होंन इन तमाम इलज़ामों को ग़लत बताते हुए अमरीकियों को आश्वासन दिलाया था की सियासी या व्यापारिक फ़ायदे के कारण अल-मगराही को रिहा नहीं किया गया था.

उन्होंने न्यायिक जांच कराने की मांग उसी समय ठुकरा दी थी . अमरीका मगराही की रिहाई के समय से शक जताता रहा है की स्वास्थय के बजाए व्यवसायिक लालच के कारण उन्हें रिहा किया गया था.

अमरीका के अनुसार ब्रिटेन की तेल कंपनी बीपी लीबिया से बड़ा सौदा करना चाहती थी जिसके लिए लीबिया ने शर्त यह रखी थी की पहले मगराही को रिहा किए जाए.

ब्रितानी प्रधान मंत्री ने अमरीकी दौरे में अपने देश को अमरीका का जूनियर पार्टनर कहा था. अब देखना है छोटा भाई बड़े भाई की मांग किस तरह ठुकरा पता है

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