ओबामा ने समलैंगिकों की भर्ती पर से पाबंदी हटाई

Image caption 'डू नोट ऑस्क, डू नोट टेल यानी पूछो नहीं-बताओ नहीं' नीति का विरोध बढ़ता जा रहा था

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उस क़ानून पर दस्तख़त कर दिए हैं जिसमें समलैंगिक लोगों के अमरीकी सेना में अपनी यौन प्राथमिकता का खुले तौर पर इज़हार करने पर उनकी नौकरी पर संकट नहीं आएगा.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि इस परिवर्तन से सेना मज़बूत होगी और ये सही दिशा में उठाया गया क़दम है.

उल्लेखनीय है कि अब तक अमरीका में 'डू नोट ऑस्क, डू नोट टेल यानी पूछो नहीं-बताओ नहीं' की नीति लागू थी.

'पूछो नहीं-बताओ नहीं' के तहत किसी सैनिक से ये नहीं पूछा जाता कि यौन संबंधों को लेकर उसकी प्राथमिकता क्या है और न ही उसे स्वयं इसकी जानकारी देनी होती है.

इसका मतलब ये है कि समलैंगिक लोग सेना में काम कर सकते हैं लेकिन अगर ये बात सार्वजनिक होती है तो उस सैनिक को बर्ख़ास्त किया जा सकता था.

पूछो नहीं, बताओ नहीं

अब तक 13 हज़ार ऐसे अमरीकी सैनिक फ़ौज से बर्खास्त किए जा चुके हैं जिन्होंने अपनी यौन प्राथमिकता का खुले तौर पर इज़हार किया था. इसलिए समलैंगिक सैनिकों को ये जानकारी गुप्त रखनी होती थी.

हालांकि इस क़ानून के विरोधियों का कहना है कि समलैंगिकों की मौजूदगी युद्ध के दिनों में सैनिकों की मनोस्थिति को प्रभावित करेगी.

जबकि राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि अब हज़ारों देशभक्त अमरीकियों को फ़ौज से महज़ इसीलिए नहीं अलग होना पड़ेगा क्योंकि वो समलैंगिक थे.

'पूछो नहीं-बताओ नहीं' की नीति को 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने लागू किया था.

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन, इसराइल और कई अन्य देश समलैंगिकों को सेना में भर्ती की अनुमति देते हैं.

संबंधित समाचार