स्विट्ज़रलैंड के तीन लोगों पर परमाणु तस्करी का आरोप

Image caption क़दीर ख़ान ने 2004 में ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को कुछ परमाणु जानकारी देने के बारे में अपनी ज़िम्मेदारी स्वीकार की थी.

स्विट्ज़रलैंड में एक जज ने तीन लोगों के ख़िलाफ़ परमाणु तकनीक की तस्करी के मामले में मुकदमा चलाने की सिफ़ारिश की है.

स्विस मैजिस्ट्रेट एंद्रिएस मुलर ने इन लोगों पर पाकिस्तानी वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान की अगुआई में चलने वाले परमाणु तस्कर गुट की मदद करने का आरोप लगाया है.

मैजिस्ट्रेट मुलर का आरोप है कि इन लोगों को 2003 में अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने काम पर लगाया था.

स्विट्ज़रलैंड के एक ही परिवार के तीन इंजीनियरों पर आरोप है कि उन्होंने 1990 के दशक में परमाणु जानकारियों की तस्करी में बड़ी भूमिका निभाई थी.

इस परिवार के ख़िलाफ़ जाँच पिछले छह साल से चल रही थी. असल में यह उसी समय की बात है जब पाकिस्तानी वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान ने टीवी पर जनता के सामने स्वीकार किया था कि उन्होंने परमाणु तकनीक से जुड़ी जानकारियाँ ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को बेची थीं.

यह तीन लोगों की टीम थी जिसमें पिता फ्रेडरिक टिनर और उनके दो बेटे उर्स और मार्को शामिल थे.जज ने सिफ़ारिश की है कि इन तीनों लोगों के ख़िलाफ़ आधिकारिक तौर पर आरोप दर्ज किए जाएँ.

तस्करी

मैजिस्ट्रेट मुलर का आरोप है कि इन लोगों को 2003 में अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने काम पर लगाया था.

इस मामले की जाँच को लेकर शुरू से ही विवाद रहा है. स्विट्ज़रलैंड की सरकार ने जाँच के दौरान इक्ट्ठा किए गए ढेर सारे दस्तावेज़ों को नष्ट करने का आदेश दिया था.सरकार का कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से ऐसा करना ज़रूरी है.

सरकार का ये भी कहना था कि जाँच के दौरान परमाणु तकनीक के बहुत सारे सारे रहस्यों के सार्वजनिक जानकारी में आने का ख़तरा था जो परमाणु अप्रसार संधि के नियमों का उल्लंघन होगा.

स्विस सरकार के इस निर्णय के बारे में आलोचकों का कहना था कि ऐसा अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी के दबाव में किया गया, मगर सरकार इस तरह के आरोपों को ग़लत बताती है.

अब स्विट्ज़रलैंड के न्याय विभाग को तय करना है कि इन लोगों के ख़िलाफ़ औपचारिक स्तर पर मुक़दमा चलाया जाए या नहीं.

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