ईरान ने जासूसों को दी फाँसी

ईरान
Image caption ईरान में इस साल अब तक 171 लोगों को फांसी दी जा चुकी है

ईरान में अधिकारियों कहना है दो लोगों को गोपनीय जानकारियाँ देने का दोषी मानते हुए फाँसी दी गई है.

इसमें से एक व्यक्ति को इसराइल के लिए जासूसी करने और दूसरे को विपक्षी गुट पीपुल्स मुजाहिदीन के साथ कथित संबंध रखने का दोषी पाया गया है

इन दोनों को मंगलवार को फांसी दी गई.

तेहरान में अभियोग पक्ष का कहना है कि अली अकबर सिआदत ने इसराइल की ख़ुफिया एजेंसी मोसाद को ईरान की मिसाइलों और सैन्य अड्डों के बारे में सूचना दी थी.

वहीं अली सरेमी को वर्ष 2007 में राजनैतिक कैदियों को सम्मानित करने वाले एक समारोह में भाग लेने के लिए गिरफ़्तार किया गया था.

मोसाद से संबंध

समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ अली अकबर सियादत को छह साल तक मोसाद के साथ संबंध रखने का दोषी पाया गया था.

सियादत ने पूछताछ के दौरान ये माना था कि वे इसराइल के दूतावासों से संपर्क में थे और ईरान की मिसाइलों के बारे में उन्हें जानकारी देते थे.

एजेंसी के अनुसार सियादत इसराइली ख़ुफिया एजेंसी के लोगों से तुर्की, थाईलैंड और नीदरलैंड में मिला करते थे.

सियादत को दो साल पहले उनकी पत्नी के साथ गिरफ़्तार किया गया था जब वे ईरान छोड़कर जा रहे थे.

उनके पास से 29 पन्नों वाला एक गोपनीय दस्तावेज़ मिला था.

वहीं ईरान में विपक्षी गुट पीपुल्स मुजाहिदीन के सदस्य अली सरेमी को क्रांति विरोधी गुट के लिए गतिविधि में भाग लेने और उन्हें जानकारी देने का दोषी पाया गया था.

1979 के बाद सरेमी को कई बार गिरफ़्तार किया गया था.

इन दो घटनाओं को मिलाकर ईरान में इस साल अब तक 171 लोगों को फांसी दी जा चुकी है.

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