अफ़ीम की बढ़ती क़ीमत से चिंता

अफ़ीम की खेती
Image caption अफ़ग़ानिस्तान में पिछले साल अफ़ीम के दामों में भारी उछाल आया

अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि पिछले एक साल में अफ़ीम के दाम तीन गुने हो गए जिससे ये ख़तरा बढ़ गया है कि और किसान अफ़ीम की खेती करने लगेंगे.

पाला मार जाने से अफ़ीम की फ़सल में 48 प्रतिशत की कमी आई जिससे दाम चढ़ गए.

दुनिया की 90 प्रतिशत अफ़ीम अफ़ग़ानिस्तान से आती है और तालिबान की आय का भी यही मुख्य स्रोत है.

अफ़ग़ानिस्तान के मादक पदार्थ निरोधक उपमंत्री मोहम्मद इब्राहिम अज़हर का कहना है कि पिछले साल अफ़ीम के दामों में नाटकीय उछाल आया है.

इसकी वजह से किसानों को कम मुनाफ़े वाली फ़सल उगाने के लिए प्रोत्साहित करना मुश्किल हो गया है.

अफ़ीम पर निर्भरता

इस समय अफ़ग़ानिस्तान में 17 लाख लोग अफ़ीम के उत्पादन पर निर्भर करते हैं और मादक पदार्थों के उत्पादन और तस्करी से तालिबान का काम भी चलता है.

विश्व बाज़ार में अफ़ीम का क़रीब 65 अरब डॉलर का व्यापार होता है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार इसमें से तालिबान को 10 से 40 करोड़ डॉलर की आमदनी होती है.

अफ़ग़ानिस्तान की सरकार और पश्चिमी देशों ने इस समस्या से निबटने के लिए कई विकल्प खोजे.

अफ़ीम के खेत नष्ट करके अन्य फ़सलें लगाने को प्रोत्साहन दिया गया.

मोहम्मद इब्राहिम अज़हर का कहना है कि जब तक किसानों को कोई अच्छा विकल्प नहीं मिलता, अफ़ीम के खेत नष्ट करने भर से काम नहीं चलेगा.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार किसानों ने 2010 में अफ़ीम से 60 करोड़ 40 लाख डॉलर कमाए जो 2009 के मुक़ाबले 38 प्रतिशत अधिक है.

जबकि 2009 में गेहूं के दाम चढ़े थे और अफ़ीम के घटे थे इसलिए किसानों को गेंहू की फ़सल उगाने का प्रोत्साहन मिला था.

लेकिन 2010 में 3,900 टन अफ़ीम की पैदावार हुई जो 2003 के बाद से सबसे कम है. इसलिए अचानक दाम चढ़ गए.

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