कभी अर्श...कभी फ़र्श

ओबामा
Image caption दो साल बाद ओबामा का कामकाज और उनकी उपलब्धियां देखी जाएं तो इतनी मायूसी भी नहीं होनी चाहिए.

अगले हफ़्ते बराक ओबामा को अमरीका के राष्ट्रपति पद पर बैठे दो साल हो जाएंगे.

ऐसा लगता है यह कल ही की बात है जब जाड़े की एक सर्द शाम को उन्होंने शपथ लेकर अमरीकी इतिहास का एक नया पन्ना लिखा था.

जब वो अमरीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने तो लोगों में ग़ज़ब का उत्साह था. कुछ लोगों ने उनके बारे में यह विश्वास करना शुरू कर दिया था कि उनका राष्ट्रपति बनना भगवान का एक चमत्कार था.

उन्हें खुद इस ऐतिहासिक घड़ी का खूब एहसास था क्योंकि लोगों को उनसे काफ़ी उम्मीदें थीं.

उम्मीदें

लेकिन आज उनकी लोकप्रियता दो साल पहले के मुकाबले काफ़ी कम हो गयी है. लोगों की उनसे उम्मीदें भी कम हो गयी हैं.

उन्होंने इतिहास ज़रूर बनाया लेकिन सबको मालूम था कि वो एक ऐसे समय में पद पर बैठे हैं जब अमरीका दो युद्ध लड़ रहा था और अर्थव्यवस्था 1930 के बाद से अब तक के सबसे भयानक संकट में घिरी थी.

जॉर्ज बुश ने सरकारी खज़ाना खाली कर दिया था और अरबों डॉलर के क़र्ज़ का बोझ छोड़ कर पद से हटे थे.

दो साल बाद ओबामा का कामकाज और उनकी उपलब्धियां देखी जाएं तो इतनी मायूसी भी नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के कड़े विरोध के बावजूद स्वास्थ्य बिल पारित करवाया जिससे उन ग़रीबों की मदद होगी जिनके पास बीमा कराने के लिए पैसे नहीं.

इसके बाद उन्होंने इराक़ का युद्ध समाप्त करवाने का वादा पूरा किया और सेना की अफ़ग़ानिस्तान से वापसी का सिलसिला शुरू कराने के अपने वादे पर अड़े हैं.

समलैंगिकों की सेना में भर्ती का रास्ता भी खुलवा दिया. फिर रूस के साथ परमाणु समझौते को दोबारा ज़िंदा करवाने के लिए जी जान लगा दी और कामयाब रहे.

अर्थव्यवस्था में फिर से भूचाल न आए इसके लिए कड़ा क़ानून बनाने में सफल रहे.

विरोध

अब आर्थिक स्थिति सुधरने के भी संकेत मिल रहे हैं.

यह बात भूली नहीं जा सकती कि यह सब उन्होंने अपने कड़े विरोधियों को साथ ले कर किया.

उनके नाम कुछ असफलताएं भी रहीं, लेकिन दो साल में उन्होंने जितनी कामयाबी हासिल की है वो लगभग असंभव था.

इस सब के बीच उनकी सब से बड़ी उपलब्धि रही रिपब्लिकन नेताओं और सांसदों से अपनी बात मनवाने की.

बुश के ज़माने में अमीरों को दी गई आय कर छूट की अवधि बढ़ाकर वो अपनी पार्टी के नज़दीक रिपब्लिकन नेताओं के आगे झुक गए लेकिन इस समझौते का फ़ायदा उन्हें अब ज्यादा मिलेगा.

इन दो सालों में वो केवल डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति थे अगले दो सालों में वो डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के राष्ट्रपति हैं.

पिछले एक महीने में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है. जो लोग नवंबर के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की हार के बाद ओबामा को अगले राष्ट्रपति के लिए उम्मीदवार के रूप में नहीं देख रहे थे, अब वो दो साल बाद राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें ही अपने नेता के रूप में देखने लगे हैं.

और एक बानगी भूतपूर्व राजदूत को दी गई टिप की...

आज कल वाशिंगटन में काफी ठण्ड है और दफ्तर से लौटते समय मैं ट्रेन के बजाए अक्सर टैक्सी ले लेता हूँ. थोड़े से पैसे ज़रूर खर्च होते हैं लेकिन टैक्सी वालों से बातें करके बड़ा मज़ा आता है.

सही मायने में उनमें से कुछ लोग काफी दिलचस्प होते हैं और उनका अनुभव बहुमूल्य होता है. हाल में मैं दो ऐसे टैक्सी वालों से मिला जो किसी कंपनी के अध्यक्ष हो सकते थे या किसी विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर.

सोमवार को मेरी मुलाक़ात हुई एक पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवर से. वो 34 वर्ष पहले लाहौर से आए थे और तब से वाशिंगटन में टैक्सी चला रहे हैं. उनकी उम्र साठ साल से कम की होगी.

मर्ज़ी के मालिक

वो कृषि के क्षेत्र में एक छात्र की हैसियत से आए थे. आठ साल बाद अमरीका के प्रसिद्ध मेरीलैंड यूनिवर्सिटी से पिएचडी करके निकले.

उन्होंने बताया की उनका एक बेटा कंप्यूटर साइंस इंजीनियर है और साल भर में एक लाख साठ हज़ार डॉलर कमा लेता है. उसकी एक बेटी है और वो भी इसी क्षेत्र से जुड़ी है.

यह सुनाते समय उसे गर्व हो रहा था. फिर मैंने उनसे पूछा कि आप पीएचडी कर चुके हैं और आज भी टैक्सी चलाते हैं तो आपके रिश्तेदार और देशवासी आपको सफल तो नहीं कहेंगे.

तो उन्होंने जवाब दिया कि वो आज़ाद ख्याल हैं, अपनी मर्ज़ी के मालिक हैं. उन्होंने मुझसे कहा, "आप अपनी कंपनी की मर्ज़ी के मुताबिक काम करते हैं. तो कौन आज़ाद हुआ आप या मैं?"

मैं खामोश रहा, वो मुस्कुराए और बोले कभी मेरे घर आइए और हमारी लाइब्रेरी देखिए. मुझे जो दौलत मिली है वो करोड़ों डॉलर कमा कर भी नहीं मिलती.

उन से पहले लगभग उन्हीं की उम्र के एक और टैक्सी वाले की टैक्सी में बैठकर मैं घर लौट रहा था. रात के 12 बज रहे थे नौजवान लड़के लड़कियां सड़कों पर शराब के नशे में हंगामा कर रहे थे.

बीता दौर

शुक्रवार के दिन यह नज़ारा आमतौर से देखने को मिलता है. उन्होंने मुझ से कहा, "मैं 1978 से वाशिंगटन डीसी में रह रहा हूँ. इस शहर का कल्चर इस क़दर बदल गया है. जब हम इन नौजवानों की उम्र के थे तो शराब पी कर सड़कों पर हंगामा करने वाले नहीं मिलते थे".

मैंने पूछा क्या आप यहाँ पढने आए थे तो उन्होंने जवाब दिया नहीं फिर कुछ मिनटों के बाद एक इमारत की तरफ इशारा करते हुए कहा, "मैं इस इमारत के अंदर एक दफ्तर का बॉस था".

मैंने पूछा क्या मतलब, तो उन्होंने कहा यह इमारत ईरान की संपत्ति थी और यहाँ इस्लामी आंदोलन के बाद तक ईरान का दूतावास होता था.

आंदोलन के बाद थोड़ा सा स्टाफ रह गया था और मैं उन सब का बॉस था.

मैं शाह का आदमी समझा जाता था इसलिए मेरा ईरान लौटना खतरे से ख़ाली नहीं था. मैं ने यहाँ सियासी पनाह ले ली और तब से टैक्सी चला रहा हूँ.

मैं घर पहुँच चुका था और मैंने किराए के अलावा कुछ टिप दी और मन में सोचा कि मैंने पहली बार किसी भूतपूर्व राजदूत को टिप दी है.

वो भी मन ही मन मुस्कुराए और टैक्सी फ़र्राटे लेते आगे बढ़ गयी.

ये भी बता दूँ कि वो मुंबई में ईरानी सांस्कृतिक केंद्र के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और बॉलीवुड के दीवाने हैं.

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