मुक़्तदा सद्र तीन साल बाद इराक़ लौटे

मुक़्तदा सद्र
Image caption तीन साल बाद इराक़ लौटने पर अपने समर्थकों के साथ नजफ़ में मुक़्तदा सद्र

अमरीका विरोधी इराक़ी शिया मौलवी मुक़्तदा सद्र तीन साल के आत्मनिर्वासन के बाद इराक़ लौट गए हैं.

मुक़्तदा सद्र तीन साल से अधिक साल तक ईरान में रहने के बाद इराक़ी शहर नजफ़ लौट गए हैं.

मुक़्तदा सद्र ने मेहदी सेना के नाम से अपनी अलग टुकड़ी बनाई थी और 2003 में इराक़ पर अमरीका की अगुआई में हुए हमले के बाद से मेहदी सेना की अमरीकी और इराक़ी सेनाओं के साथ कई बार झड़प हुई थी.

लेकिन पिछले महीने मुक़्तदा सद्र के राजनीतिक गुट ने नई सरकार के साथ एक समझौता किया जिसके तहत 39 संसदीय सीटों वाली उनकी पार्टी को सात मंत्रिपद मिले हैं.

उनके नजफ़ लौटने को इराक़ में स्थिति के सामान्य होने का एक और संकेत माना जा रहा है.

बग़दाद से बीबीसी संवाददाता जिम म्योर का कहना है कि पिछले तीन साल से नज़रों से दूर रहनेवाले मुक़्तदा सद्र के सैकड़ों समर्थक अपने नेता का स्वागत करने के लिए उनके घर के बाहर जमा हो गए.

मुक़्तदा सद्र सार्वजनिक रूप से कम ही दिखाई देते हैं इसलिए उनकी एक झलक पाने के लिए हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर पड़े.

नजफ़ और सद्र

Image caption हज़रत इमाम अली की दरगाह शिया मुसलमानों के लिए एक पवित्र स्थल है

नजफ़ शिया मुसलमानों के लिए एक पवित्र स्थल है जहाँ हज़रत इमाम अली की दरगाह है.

मुक़्तदा अल सद्र का जन्म नजफ़ में हुआ था और ये शहर उनका गढ़ रहा है.

एक धार्मिक शिया परिवार में जन्मे मुक़्तदा सद्र ने इराक़ में सद्दाम हुसैन की सत्ता के पतन के बाद अमरीका विरोधी भावनाओं को काफ़ी उभारा था.

वे और उनके समर्थक लगातार अमरीकी सैनिकों के इराक़ से बाहर निकलने की माँग करते रहे जिसके बाद 2006-2007 में उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी हो गया.

इसके बाद तीन साल पहले वे अचानक ईरान चले गए. समझा जाता है कि पिछले तीन साल से वे ईरान के शहर क़ूम में धार्मिक अध्ययन कर रहे थे.

मुक़्तदा सद्र ने 2008 में अपनी मेहदी सेना के समर्थकों के हथियार डालने की भी घोषणा की थी.

मगर इसके बावजूद अमरीकी सेना और कई सुन्नी अरब उनकी गतिविधियों को संदेह की नज़र से देखते हैं.

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