दक्षिण सूडान अस्थिर राष्ट्र होगा:बशीर

ओमर अल बशीर
Image caption सूडान के राष्ट्रपति ने दी चेतावनी कि देश का विघटन अस्थिरता पैदा करेगा

सूडान के राष्ट्रपति उमर अल बशीर ने चेतावनी दी है कि अगर दक्षिण सूडान उत्तर से अलग होने का फ़ैसला करता है तो उसे अस्थिरता का सामना करना पड़ेगा.

रविवार को सूडान के दो हिस्से किए जाने पर जनमत संग्रह होने वाला है.

बशीर ने अल-जज़ीरा टीवी को दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि दक्षिण सूडान न तो स्थिर राज्य गठित कर सकता है और न ही अपने नागरिकों की ज़रुरत पूरी कर सकता.

ख़ारतूम में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये वक्तव्य छापामार संगठन एसपीएलएम को बेहद नाराज़ करेगा.

2005 में गृह युद्ध की समाप्ति के बाद से इन छापामारों का दक्षिण पर शासन था.

रविवार को होने वाले अंतिम मतदान के पहले दक्षिण में रैलियों का आयोजन किया गया.

संवाददाताओं का मानना है कि अधिकतर लोग सूडान के दो हिस्से करने के हक़ में मत डालेंगें और दुनिया के नवीनतम देश का जन्म होगा.

उत्तर और दक्षिण के बीच दो दशकों तक चले गृह युद्ध को 2005 में समाप्त करते समय जो समझौता हुआ था उसमें जनमत संग्रह करवाने का वादा शामिल था.

मुक्ति

अरबी टीवी चैनल अल-जज़ीरा को दिए एक साक्षात्कार में बशीर ने कहा कि वो समझ सकते हैं कि दक्षिण के इतने सारे लोग क्यों स्वतंत्रता चाहते हैं. हालांकि उन्होंने इस बात पर चिंता भी व्यक्त की कि नया देश स्थितियों का सामना कैसे कर पाएगा.

उनका कहना था, “दक्षिण कई समस्याओं से घिरा है. 1959 से यहाँ युद्ध चल रहा है. दक्षिण के पास न स्थिरता देने और न ही अपने लोगों की ज़रुरत पूरी करने की क़ाबलियत है.”

बशीर ने कहा कि उत्तर में रहने वाले दक्षिण सूडानवासियों को दोहरी नागरिकता नहीं दी जाएगी.

उन्होंने युरोपीय संध की तर्ज़ पर उत्तर-दक्षिण का एक संघ बनाने की बात की.

उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि अगर दक्षिण पूरे क्षेत्र को अपने कब्ज़े में करने की कोशिश करता है तो यहाँ युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है.

विश्लेषकों का मानना हैं कि बशीर पर उत्तर के नेताओं का भारी दबाव है जो मानते हैं कि दक्षिण के उत्तर सूडान से अलग होने के बाद देश के और तुकड़े भी हो सकते हैं.

उत्तर और दक्षिण सूडान दशकों से धर्म और जाति के विरोधाभासों के कारण आपस में लड़ते रहे हैं.

दक्षिण के लोगों का कहना हैं कि ख़ारतूम की सरकार के तहत उनके साथ हमेशा दुर्वव्यवार हुआ है.

अब दक्षिण सूडानवासियों के पास एक सप्ताह होगा जिसमें वो दुनिया के एक सबसे पिछड़े इस क्षेत्र के भविष्य पर अपना मत डाल सकेंगे.

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