दुनियाभर में बाढ़ की वजह है 'ला नीना'

ब्राज़ील में बाढ़

दुनिया भर में आख़िर क्यों इतनी बाढ़ आ रही है? ब्राज़ील, कोलंबिया, ऑस्ट्रेलिया, फ़िलिपीन्स और श्रीलंका में जो भारी बारिश आई है इसके लिए विशेषज्ञ एक ही प्रक्रिया को कारण मानते हैं.

दुनियाभर के कई देश जैसे ब्राज़ील, कोलंबिया, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपीन्स और श्रीलंका में पिछले कुछ दिनों में इतनी बरसात हुई है जितनी शायद साल भर में नहीं होती.

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ये 'ला नीना' के कारण हुआ है. 'ला नीना' वो मौसमी प्रक्रिया है जो प्रशांत सागर पर असर डाल रही है.

ब्राज़ील में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुए हैं जिसमें 500 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

ऑस्ट्रेलिया के तीसरे सबसे बड़े शहर ब्रिस्बेन में सौ सालों की सबसे बुरी बाढ़ आई जिसमें बहुत से लोग मारे गए और कई अब भी लापता हैं.

श्रीलंका में 10 लाख से अधिक लोग भारी बारिश की मार झेल रहे हैं.

ला नीना

मौजूदा मुसीबत ऑस्ट्रेलिया के पूर्व में पानी की धारा और हवा के बहाव के आपस में मिलने से आई है.

प्रशांत सागर से आम तौर पर ठंडे पानी की धारा ऑस्ट्रेलिया की तरफ पूर्व से बहती है. अब वो तेज़ी पकड़ रही है और समुद्र गर्म हो रहा है ,जिससे बादल बन रहे हैं और अत्याधिक बारिश हो रही है.

ब्रिटेन के रेडिंग विश्वविद्यालय के एक मौसम विशेषज्ञ, निकोलस क्लिंगमैन का कहना है कि ला नीना की भविष्यवाणी की जा सकती है पर ये बताना बहुत मुश्किल है कि इससे कितनी बारिश होगी.

क्लिंगमैन ने कहा “हमने कछ महीने पहले भविष्यवाणी की थी कि ये प्रक्रिया गहन होगी पर हमें जो अनुमान नहीं था कि ये ऑस्ट्रेलिया में आमतौर पर होने वाली बारिश के सभी रिकॉर्ड़ तोड़ देगी.”

पाकिस्तान की मौनसून की बारिश, जिससे कम से कम दो करोड़ लोग प्रभावित हुए थे और 1,800 लोग मारे गए थे, उसे भी 'ला नीना' के असर के रुप में देखा जा सकता है.

बीबीसी की मौसम भविष्यवक्ता नीना रिज का कहना है, "ऐसे प्रमाण हैं कि श्रीलंका की बारिश का भी वही कारण है क्योंकि ये प्रक्रिया तेज़ हवाएं पैदा करती है और अपने साथ बरिश के बादल भी ले आती है जो ये सामान्य मॉनसून पर और दबाव बढ़ाते हैं."

लातिनी अमरीका

Image caption ब्राज़ील में अब तक चार सौ से अधिक लोग मारे जा चुके हैं

ये प्रक्रिया ब्राज़ील, कोलंबिया और वेनेज़ुएला में भी असर डाल रही है.

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एटलांटिक महासागर में इसकी वजह से मौसम में तेज़ी से बदलाव आ रहा है और भारी बारिश हो रही है.

पिछले साल मैक्सिको में 130 लोगों की मौत और ग्वाटेमाला में 163 लोगों की मौत के पीछे भी 'ला नीना' का ही हाथ था.

वेनेज़ुएला में 38 लोग मारे गए थे और छह अब भी लापता हैं. वहाँ एक लाख तीस हज़ार लोग अब भी बेघर हैं और उन्हें काफी आर्थिक नुक़सान झेलना पड़ा है.

कोलंबिया के कॉफी बाग़ानों पर इसका असर हुआ है और इसकी मार अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगी.

केंद्रीय अमरीका में पनामा नहर, जिसका इस्तेमाल जहाज़ से होने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार का पांच प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा होता है, उसे भी दो दशकों में पहली बार ज़्यादा पानी होने की वजह से बंद करना पड़ा.

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