'भारतीय कूटनयिक के खिलाफ़ जाँच होगी'

Image caption लंदन स्थित भारतीय दूतावास जहाँ अनिल वर्मा तैनात हैं

विदेश मंत्रालय का कहना है कि अनिल वर्मा पर अपनी पत्नी से साथ कथित मारपीट करने के मामले की पूरी जाँच की जाएगी और मौजूदा क़ानूनों के तहत उपयुक्त कारवाई की जाएगी.

ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग के व्यापार और वाणिज्य मामलों के प्रभारी अनिल वर्मा पर अपनी पत्नी से साथ मारपीट करने के मामले में विदेश मंत्रालय ने सार्वजनिक रुप से पहली बार मंगलवार को अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने इस मामले में कहा है कि “अनिल वर्मा और उनके परिवार को वापस दिल्ली मुख्यालय बुला लिया गया है. और जैसे ही अधिकारी वापस भारत पहुँचते है, इस मामले की पूरी जाँच की जाएगी और मौज़ूदा क़ानूनों के तहत उपयुक्त कारवाई की जाएगी”

विष्णु प्रकाश ने ये भी कहा कि इस मामले को नज़रअंदाज़ करने का सवाल ही नहीं उठता.

विष्णु प्रकाश ने कहा कि भारत में एक पारदर्शी न्याय प्रणाली है और इस मामले को देश के क़ानून के हिसाब से निपटा जाएगा.

यह मामला भारत के लिए शर्मिंदगी का कारण बन गया था क्योंकि ब्रितानी विदेश मंत्रालय ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग से कहा था कि अनिल वर्मा की डिप्लोमैटिक इम्युनिटी (कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा का कूटनयिक विशेषाधिकार) वापस ले ली जाए.

इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि मामले पर विचार किया जा रहा है और हड़बड़ी में कोई फ़ैसला नहीं किया जाएगा.

अनिल वर्मा को भारत बुलाए जाने पर जानकारों को कोई आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस की कार्रवाई से उन्हें बचाने और मामले को रफ़ादफ़ा करने का यही एक तरीक़ा था.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि वर्मा के भारत आने के बाद अगर ज़रूरत हुई तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा सकती है.

बताया जाता है कि उत्तरी लंदन स्थित अनिल वर्मा के आवास पर एक महिला के चीख़ने की आवाज़ सुनने के बाद पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी थी, जब पुलिस उन्हें कूटनयिक होने की वजह से गिरफ़्तार नहीं कर सकी तो मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने मामले की सूचना ब्रितानी विदेश विभाग को दे दी.

ब्रितानी विदेश मंत्रालय ने मामले को काफ़ी गंभीरता से लिया था और उसकी ओर से जारी एक बयान में कहा गया था, "हम बर्दाश्त नहीं करते कि ब्रिटेन में काम करने वाले कूटनयिक देश का क़ानून तोड़ें. हम चाहते हैं कि वे हमारे क़ानूनों का उसी तरह सम्मान करें जिस तरह हमारे कूटनयिक दूसरे देशों के क़ानूनों का सम्मान करते हैं."

अनिल वर्मा लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में उच्यायुक्त और उप-उच्चायुक्त के बाद तीसरे सबसे बड़े अधिकारी थे और उनपर व्यापार और वाणिज्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग की ज़िम्मेदारी थी.

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी वर्मा इससे पहले मौजूदा वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के निजी सचिव भी रह चुके हैं.

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