'ट्यूनीशिया की नई सरकार पर संकट'

ट्यूनीशिया में विरोध प्रदर्शन
Image caption ट्यूनीशिया में नई सरकार संकट में पड़ गई है. इस बीच लोगों का विरोध प्रदर्शन जारी है.

ट्यूनीशिया में नई गठित राष्ट्रीय सरकार का भविष्य ख़तरे में पड़ गया है. लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण सोमवार को सरकार बनने के सिर्फ़ एक दिन बाद मंगलवार को अंतरिम सरकार के कम से कम तीन मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दे दिया.

इन मंत्रियों का कहना है कि वे उस प्रशासन को समर्थन नहीं दे सकते जिसमें पिछली सरकार के सदस्य शामिल हों.

सिर्फ़ एक दिन पहले सोमवार को प्रधानमंत्री मोहम्मद ग़नूशी ने एक राष्ट्रीय सरकार के गठन की घोषणा की थी लेकिन नई सरकार में पिछली सरकार के कुछ मंत्रियों को शामिल किए जाने के मुद्दे पर विपक्षी दलों में गतिरोध पैदा हो गया था.

एक साथ तीन मंत्रियों के सरकार से अलग होने की घोषणा ने इस अंतरिम सरकार को संकट में डाल दिया है.

ये तीनों मंत्री ट्यूनीशिया के श्रमिक आंदोलन से जुड़े हुए हैं. इन मंत्रियों का और उनके समर्थकों का कहना है कि वे उस सरकार का हिस्सा बनने में असमर्थ हैं जिसके ज़्यादातर सदस्य पिछली 'तानाशाही' सरकार में शामिल थे.

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने मसले का हल निकालने के लिए खुद सत्तारुढ़ पार्टी आरसीडी से नाता तोड़ लिया और पार्टी के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया.

इस्तीफ़ा

कार्यकारी राष्ट्रपति फोआद मेबाज़ा पिछली सरकार में संसद के अध्यक्ष थे जबकि प्रधानमंत्री मोहम्मद ग़नूशी आरसीड़ी के एक वरिष्ठ नेता हैं और 1999 से देश के प्रधानमंत्री हैं.

प्रधानमंत्री मोहम्मद ग़नूशी ने प्रदर्शनकारियों को समझाने के लिए कहा कि नई सरकार के सभी मंत्री साफ़ सुथरे छवि के हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर प्रधानमंत्री की बातों का कोई असर नहीं हुआ.

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि पिछली सरकार के किसी भी आदमी को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जाए और अब तक सत्तारुढ़ पार्टी आरसीडी को भंग कर दिया जाए.

इस बीच जिन कुछ नए मंत्रियों ने अपना पद नहीं छोड़ा है उनका कहना है कि नई सरकार में शामिल होकर काम करना अच्छा लग रहा है.

इन्हीं में से एक हैं स्लिम अमामू, जो कि अपदस्थ राष्ट्रपति बेन अली को हटाने के लिए किए जा रहे प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे थे और इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.

नई सरकार में उन्हें युवा और खेल मंत्री बनाया गया है. उनके मित्र ज़ीद म्हिर्सी उनके प्रवक्ता भी हैं.

उनका कहना था, ''हम लंबे समय से सरकार के बाहर रहे हैं. और ये हमारे लिए एक बहुत अच्छा अवसर है कि हम व्यवस्था के भीतर रहकर उसे देखें. और हमारे मंत्रियों ने फ़ैसला किया है कि वो सरकार के भीतर के अपने अनुभवों को ट्विटर के माध्यम से लोगों के साथ साझा करेंगे.''

विरोध प्रदर्शन

इस बीच राजधानी ट्यूनिस और कुछ अन्य शहरों में लोकतंत्र समर्थकों का आंदोलन एक बार फिर हिंसक हो गया है. ऐसे में फिलहाल किसी लोकतांत्रिक सरकार के गठन की उम्मीद नहीं दिख रही है.

ट्यूनीशिया के विदेश मंत्री कामेल मोर्जेन इस समय अरब देशों के प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए मिस्र के शर्म अल शेख में हैं.

ग़ौरतलब है कि ट्यूनीशिया में जन विद्रोह के बाद प्रधानमंत्री मोहम्मद ग़नूशी ने सोमवार को राष्ट्रीय सरकार के गठन की घोषणा की थी.

नई सरकार में पिछली सरकार के कुछ मंत्रियों समेत विपक्षी दलों के भी कुछ नेताओं को शामिल किया गया था

भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी के मुद्दे पर पिछले तीन सप्ताह से हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के चलते पिछले सप्ताह राष्ट्रपति ज़ैन अल आबिदिन बिन अली देश छोड़कर सऊदी अरब भाग गए थे.

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